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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Friday, September 23, 2011

किनसे पूछा?

जिन लोगों ने तुम्हे सलामी देने से इंकार किया
उनको राष्ट्राध्यक्ष मानकर क्यूँ तुमने सम्मान दिया?

हत्यारों को यहाँ बुलाने का उपाय कैसे सूझा?
उनको यहाँ बुलाने से पहले तुमने किनसे पूछा?

क्या उससे पूछा था जिसका बेटा कारगिल में सोया?
उजड़ी मांग से पूछा जिसका पति ताईगरहिल पर खोया ?

उस बहना से पूछा जो अपनी राखी न बांध सकी?
या उनसे पूछा जो अपना करवा चौथ न पार सकी?

गर पूछा होता तो वो कहते जवाब दे देने दो
जितने सैनिक खोये हैं सबका हिसाब ले लेने दो

रक्खो पूर्ण भरोषा अपने जल-थल-नौ सेनाओं पर
कह दो शुरू करें बमबारी दुश्मन की सीमाओं पर

जिस दिन सेना के स्वर में स्वर अपना आप मिला देंगे
कश्मीर क्या सैनिक पूरा पकिस्तान हिला देंगे

2 comments:

  1. क्या बात कही है पंडित जी,अति सुन्दर

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  2. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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