स्वागतम ! सोशल नेटवर्किंग का प्रयोग राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए करें.

Free HTML Codes

अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Thursday, September 1, 2011

कांग्रेस जिंदाबाद?


माना
कि भारत को अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ाने के लिए लाखों लोगों ने जान दे
दी, पर होशियार वह होता है जो मौके का फायदा उठा ले और यह करामात कांग्रेस
के अलावा और किसे आती है? आये भी क्यों न.?
कांग्रेस की स्थापना सन 1885 में सर ए ओ ह्यूम ने की थी जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के एक डायरेक्टर के पोते थे !

शायद ईस्ट इंडिया कम्पनी क्रांतिकारियों के तेवर देख कर समझ गयी थी कि
भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं है इसलिए शांतिवार्ता और मध्यस्थता के लिए
कांग्रेस नाम का एक मंच बनाया गया!श्रद्धेय श्री श्री महात्मा गाँधी जो
अफ्रीका में अपने अपमान का बदला लेने के लिए भारत यात्रा पर निकले
थेउन्हें यह मंच पसंद आया और बाबू सुभाष चन्द्र बोस के कांग्रेस अध्यक्ष
चुने जाने पर खेद व्यक्त कर के नेहरु को अध्यक्ष बनवाया!रिश्तों के लिहाज
से जो क्रांतिकारी मदर इंडिया के लिए जान दे रहे थे उन्हें फादर इण्डिया
और अंकल इण्डिया मिल गए.सत्याग्रह
यह कि अगर अंग्रेज पूछें की तुम्हारे क्रन्तिकारी मित्र कहाँ छिपे हैं तो
उन्हें सब सत्य बता दिया जाये और जब अंग्रेज क्रांतिकारियों को काला पानी
या फांसी की सजा दें तो देश के गुस्से को अहिंसा के नाम पर चुप करा दिया
जाये!
अब
इतना अच्छा आन्दोलन करनेवाला ही भागते हुए अंग्रेजों से उनका ताज लेकर
अपने सर पहन सकता था न कि बम गोली चलने वाला क्रन्तिकारी, तो भाई आजादी का
सेहरा कांग्रेस के सर पहुँच गया!
टर्निंग
पॉइंट तब आया जब कैंसर की आखिरी स्टेज पर खड़े जिन्ना ने देश का पहला
प्रधानमंत्री बनने की जिद करी और दूसरी तरफ चाचा जी ने भी...तो
फादर इंडिया तो संत आदमी थे और उन्हें अपने होनहार भाई देश के चाचा जी पर
पूरा भरोसा था तो देश को अपने पुरखों की जागीर समझ कर दो हिस्से कर
डाले..
मुसलमानों
का पाकिस्तान और बाकी सब का हिंदुस्तान.!अब
चाचा जी ने देश सम्भाला और दलितों के मसीहा श्री श्री बाबा साहब आंबेडकर
को मुखिया बना कर विदेशियों के संविधान का भारतीय संस्करण बनवाया करवाया गया.??सरकारी नौकरी पर रखने से पहले शिक्षा दीक्षा और
चाल चलन की जाँच पड़ताल का प्रावधान रखा गयालेकिन संसद में बैठ कर देश
चलने के लिए क़ानून बनाने वालों को शिक्षा या अपराधिक रिकॉर्ड की जाँच से
मुक्त रखा गया.
यह बेवकूफ भूल गए कि बापू के 3 बन्दर थे-1. आँख बंद.. बुरा मत देखो..
चाहे जितने घोटाले या आतंकवादी हमले हों..2. बुरा मत सुनो..चाहे बाबा और
अन्ना के साथ लाखों लोग गरीबी, भ्रष्टाचार और लूट के धन के खिलाफ आवाज़
उठायें..3. बुरा मत बोलो ... अपने प्रधान मंत्री और आलाकमान को ही देख
लीजिये.
लेकिन
मेरे भाई बापू का चौथा बन्दर नहीं था जो अपने स्वयं के हाथ पकडे होता और
कहता बुरा मत करो......समझ गए न?हैं.अगर अब आपके दिमाग की बत्ती जल गयी हो तो बोलो-राष्ट्रीय अतिथि
अजमल कसाब की जय...महाबली नेताओं की जय...भारत माता..ओह सोरी...???फादर
इंडिया की जय..अंकल इंडिया की जय..विदेशी/स्वदेशी महारानी की जय.. युवराज
की जय..?
मैंने देश की एक विशेष पार्टी की यशगाथा का प्रयास किया हैताकि इन्टरनेट
से लोग भ्रमित न हों और उन्हें सही ज्ञान मिल सकेलेकिन किन बातों को
छुपाना चाहिए इस मामले में मैं अभी नासमझ हूँअतः अगर कुछ गलत लिख दिया हो
तो आपके प्रकोप के डर से पहले ही माफ़ी मांग रहा हूँ.??संभवतः आप मुझ
तुच्छ को माननीय कलमाड़ी और महामहिम ए राजा जैसे पराक्रमी लोगों के साथ
तिहाड़ में भेजने का कष्ट नहीं करेंगे..कांग्रेस जिंदाबाद..????

4 comments:

  1. सुन्दर कटाक्ष

    ReplyDelete
  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
    --
    शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  3. शानदार और धारदार व्यंग्य ....

    ReplyDelete