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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Monday, December 5, 2011

बाबरी बिध्वंश के १९ साल:एक बार मुसलमान क्यों न दें धर्मनिरपेक्षता का सबूत?


आज ६ दिसंबर है और आज के ही दिन बाबरी का विवादित ढाचा कारसेवकों ने गिराकर,श्रीराम मंदिर के पुनर्निमाण के लिए मार्ग प्रशस्त किया था.यही इतिहास के गिने चुने समय में से एक समय था जब हिन्दू एक हुए थे.यह हमारे देश और सत्यासनातन संस्कृति का दुर्भाग्य ही है जिसके कारण १९ साल बीत जाने के बावजूद श्रीरामलला का मंदिर राजनितिक गलियारों के टेढ़ी मेढ़ी गलियों के भूलभुलैया में गम होकर एक मुद्दा मात्र बनकर रह गया है,जिसका उपयोग कुछ पार्टियाँ हिन्दुओं को लुभाने के लिए तो कुछ मुसलमानो का वोटबैंक बचाने के लिए उपयोग करती हैं.
मुझे बहुत दुःख होता है की हरबार धर्मनिरपेक्षता का परिचायक हिन्दू ही बनता है,क्या एक बार मुसलमान धर्मनिरपेक्ष बनकर यह नहीं कह सकता की ईश्वर एक है,आप लोग राम मंदिर का निर्माण करिए भारतीय मुसलमान अपनी गंगा-ज़मुनी तहजीब को कायम रखते हुए मंदिर निर्माण में सहायता करेंगे.

श्री रामचंद्र जी केवल हिन्दुओं के लिए पूज्य नहीं हैं,ये समस्त भारतवासियों के लिए पूज्य हैं.यही वजह है की भारत का संबिधान धर्मनिरपेक्ष होते हुए भी भगवान् राम को ही अपना आदर्श मानता है,और हमारे संबिधान के पहले पेज पर भगवान राम का चित्र लगाया गया और कहा गया है की हम आपके आदर्श पर चलकर बीना कोई भेदभाव किए अपने कर्तव्य का निर्वहन करेंगे.
ये हमारे देश के सारे मुसलमान जानते हैं की सनातन धर्म में भगवान राम की आस्था कहाँ तक जुडी है,फिर एक बार हिन्दुओं के धार्मिक भावना का आदर करते हुए उन्हें राम मंदिर के निर्माण में सहयोग करना चाहिए.जैसे काबा मुसलमानों के लिए पवित्र है,उसी तरह अयोध्या भी हिन्दुओं के लिए.आखिर हमने तो कभी नहीं कहा की हम काबा में मंदिर बनाना चाहते हैं.
कुछ लोग तर्क देते हैं की यह जगह मुसलमानों के इबादत की जगह है,उन्हें मै बताना चाहते हूँ की यह इबादत की जगह नहीं विदेशी दाषता का प्रतीक है.जिस तरह देश की आज़ादी के बाद देश भर में लगे तमाम महारानी विक्टोरिया और अंग्रेज हुक्मरानों की प्रतिमाएं तोड़ दी गयीं,उसी तरह अगर किसी देश के मूल निवासियों के आस्था के सबसे बड़े केंद्र को विदेशी चिन्ह से मुक्ति देना गलत नहीं है.
पहले मुसलमान कहते थे की यहाँ कोई मंदिर नहीं था,लेकिन अब तो ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ) ने यह भी बता दिया है की बाबरी ढाचा किसी हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था जिसमे मंदिर के अंग ही प्रयोग किये गए थे.अब तो मुसलमानों को अपना राष्ट्रधर्म निभाना चाहिए और उन करोनो हिन्दू आस्थाओं के लिए राम लला के मंदिर का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए जिनकी वजह हिंदुस्तान में मुसलमानों का वजूद है. उन्हें सोचना चाहिए की अगर सारे हिन्दू मुसलमानों की तरह सोच रखते तो क्या आज जैसी पाकिस्तान में हिन्दुओं की दशा है,हिन्दूस्तान में मुसलमानों की होती.

Sunday, December 4, 2011

फूल नहीं धधकता अंगार हूँ मैं




फूल नहीं धधकता अंगार हूँ मैं।
थके स्वाभिमान को झकझोरती ललकार हूँ मैं।
सो‍ई भारत की वर्षों से अन्तरात्मा
नवजागरण की पुकार हूँ मैं।
ग़ुलामी बस चु्की है ख़ून में
पर क्रांति की टंकार हूँ मैं।
सर अब हमारा कभी न झुकेगा
विजयमाला का शृंगार हूँ मैं।
भस्म होगी सब दासता मानस की
सच्चे स्वाधीनता की चिंगार हूँ मैं।
बुझेगा न ये दीपक चाहे कितना ज़ोर लगा लो
हर आँधी तूफ़ान की बेबस हार हूँ मैं।
अग्निमय हूँ अग्निरूप हूँ अग्नि का उपासक हूँ
अग्नि मेरी आत्मा सत्याग्नि का ही विस्तार हूँ मैं।

साभार
www.agniveer.com

Wednesday, November 30, 2011

मै तो बस कविता लिखता

मै नहीं चाहता अभिनन्दन गाऊं झूठे दरबारों का
संसद में बैठे चोरों का,सत्ता के पहरेदारों का

मै नहीं चाहता गीत लिखूं,प्रेयसि की कंगन-बाली का
उसके आखों के काजल का,उसके अधरों की लाली का

मै नहीं चाहता झूठ लिख,कवियों का एक दिनमान बनूँ
धनिकों का गुण गा-गा करके,लोगों में एक सम्मान बनूँ

मैंने तो कलम उठाई है,भारत की व्यथा बताने को
मजदूर-किसानो के आशूं की,सबको कथा सुनाने को

लिखने को सम्मान हमारे सरहद के रखवालों का
भगत सिंह,अशफाक,उधम से,देशभक्त मतवालों का

मै तो बस कविता लिखता,गंगा के निर्मल पानी पर
जो द्रास-बटालिक में सोये,उनको बिंदास जवानी पर

-राहुल पंडित

Wednesday, November 23, 2011

रक्तदान महादान



कहते हैं रक्त दान महादान.अगर आप जरुरत मंदों के लिए कुछ करना चाहते हैं तो आज ही हमारे इस मुहीम का हिस्सा बने और यह वेबसाइट ज्वाइन करें.

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Saturday, November 19, 2011

धर्मनिरपेक्षवादियों की सच्‍चाई

1. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ?

2. विश्व में लगभग 52 मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ?

3. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?

4. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ?

5. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?

6.
महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम
मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल
राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?

7. 1947
में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1%
रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश
बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या
हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई
मानवाधिकार हैं ?

8. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ?

9.
यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते
रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और
कोई शक्ति नहीं है" ?

10. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश
के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948
में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू
और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ?

11. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

12. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?

13.
मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते
हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और
रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ?

14. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ 85% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, 15% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?


अगर
नरेन्‍द्र मोदी जी अपने उपवास के दौरान किसी मुल्‍ला की टोपी नहीं पहनते
तो अपने आप को सेकुलर कहने वाले भांड मीडिया और कांग्रेसी कुत्‍ते भौंकने
लगते है कि यह सांप्रदायिक और हिन्‍दुवादी है परन्‍तु इन कुत्‍तों से यह
पूछो कि क्‍या यह मुल्‍ला अपने माथे पर तिलक और शरीर पर भग्‍वा चादर ओढ
सकते है या अपने गले में तुलसी की माला पहन सकते है अगर कोई हिन्‍दू
इन्‍हें यह पहनाना चाहे तो, यहां तक कि यह तो भारतमाता की जय और वंदे मातरम
बोलना भी इस्‍लाम के विरूद्ध मानते है तो पूछो इस भांड और बिकाउ मीडिया और
उन कांग्रेसी कुत्‍तों से जरा जो बार बार मोदी जी पर एक टोपी न पहनने के
कारण सांप्रदायिक और हिन्‍दूवादी होने का आरोप लगा देते है परन्‍तु उस
वक्‍त कांग्रेस सहित उन सभी राजनीतिक दलो एवं भांड तथा बिकाउ मीडिया का
सेकुलरवाद कहां चला जाता है?

श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के तीन दिन के
उपवास के दौरान बिकाउ और भांड मीडिया ने तथा कांग्रेसी कुत्‍तों व अन्‍य
विरोधी राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को खुश करने के लिए अपनी पूरी ऐडी चोटी
का जोर लगा दिया कि किसी भी तरह नरेन्‍द्र मोदी को बदनाम किया जाए और इसी
काम में यह रात दिन लगे रहे और इसके लिए दो दो टके के कांग्रेसी व मल्लिका
साराभाई जैसे सेकुलर कुत्‍तों को अपने स्‍टुडियों में लाकर बैठा दिया गया
और वहां से मोदी जी को बदनाम करने की पूरी ताकत लगा दी मैंने इससे पहले इस
सारी मीडिया को केवल बाबा रामदेव के खिलाफ ही एकजुट देखा था जब इस बिकाउ और
भांड मीडिया ने बाबा रामदेव जी को बदनाम करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक
दी थी और कांग्रेस ने इस पूरी भांड और बिकाउ मीडिया को खरीदने के लिए इन पर
चौदह सौ करोड रूपये खर्च किए थे

जिस तरह यह भांड और बिकाउ मीडिया
देशभक्‍त बाबा रामदेव और श्री नरेन्‍द्र मोदी जी को बदनाम करने के लिए
एकजुट हो जाती है इसी तरह यह बिकाउ और भांड मीडिया देश में जब यह कांग्रेस
महंगाई करती है या देश पर इनके कारण आतंकवादी हमले होते या यह भ्रष्‍टाचार
करते है तब यह एकजुटता दिखाई नहीं देती है केवल अलग अलग करके सभी केवल
ज्‍यादा से ज्‍यादा एक या दो दिन ही उस खबर को गर्म रखते है वो भी केवल
लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए और अपनी टीआरपी बढाने के लिए परन्‍तु
कुछ दिन में ही एक साथ सारे बिकाउ चैनलों पर से महंगाई , आतंकवाद,
भ्रष्‍टाचार आदि मुददों को दबा दिया जाता है और फिर से एक बार कांग्रेसी
कुत्‍तें और बिकाउ और भांड मीडिया मुसलमानों की तेल मालिश में लग जाते है


अब शांति नहीं सिर्फ क्रांति आजादी की दूसरी लडाई के लिए
देशहित में इस ब्लॉग को अधिक से अधिक आगे भेजे - भारतमाता की जयहमारा लक्ष्‍य भ्रष्‍ट व्‍यवस्‍था परिवर्तन

Saturday, November 5, 2011

माँ का मस्तक ऊँचा होता बेटो के बलिदानो से


भारत माँ के गालोँ पर जो ऊग्रवाद के चाँटे है
फिर भी कायर बन के वोटो के तलुवे चाटे है !

एटम बम वाली दिल्ली लाचार दिखाई देती है
सँसद भेड,बकरियो की बाजार दिखाई देती है !

भगतसिँह की फाँसी पर जो दो भी बोल नही बोले
अफजल की फाँसी पर जिनके दिल खाते है हिचकोले !

गहरे दफनाना होगा अब ऊग्रवाद के खेमो को
फाँसी के फँदो तक भेजो,जल्दी "अबूसलेमो" को !

यदि अफजल को क्षमा दान का पुरस्कार दिलवाओगे
"पृथ्वीराज"की भूले फिर से दिल्ली मेँ दोहराओगे !

अमर तिरँगे के रँगो को दुनिया मेँ फहराने दो
भारत माँ का आँचल धरती,अँबर तक लहराने दो !

आजादी का दीप जलाना पडता अपने प्राणो से
माँ का मस्तक ऊँचा होता बेटो के बलिदानो से !!

Saturday, October 29, 2011

हजरत निजामुद्दीन की दरगाह एक हिन्दू मंदिर है!


जिसे आज फ़कीर निजामुद्दीन का दरगाह समझा जाता है,यह वास्तव में एक पुराना मंदिर है,जो मुस्लिम आक्रमणों से क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद हज़रात निजामुद्दीन का दरगाह बन गया,क्योंकि उस फ़कीर को उसकी मृत्यु के पश्चात वहां दफना दिया गया था.
इस दरगाह के चारो ओर अगणित मात्रा में अन्य मंडप,प्राचीरें,कब्रें,दुर्ग के दीवार के उभड़े हुए भाग,स्तम्भ,स्तम्भपीठें अभी भी देखि जा सकती हैं.ये वस्तुएं सिद्ध करती हैं की यह किसी समय समृद्ध नगरी थी,जो पदाक्रांत हुई और विजित हुई.ऐसे तहस नहस किये गए क्षेत्रों में मुस्लिम फ़कीर जा बसते थे.बाद में उनको वाही गाड़ दिया जाता था,जहाँ वे रहते थे.इस प्रकार मुस्लिम फकीरों के दफ़नाने के स्थान मूल कब्रिस्तान नहीं हैं,अपितु वे पूर्वकालिक राजपूत भवन हैं जो बाद में मुसलमानों द्वारा बलात हथिया लिए गए.
निजामुद्दीन के मकबरे में पञ्च रत्न के पाच गुम्बद हैं.हिन्दुओं के गावों के पञ्च,पंचामृत,पंचगव्य आदि वाक्प्रचार से पाच का महत्व जाना जा सकता है.ईमारत गेरिवे रंग के पत्थर से बनी है जो हिन्दू ध्वज का रंग है.अन्दर एक विशाल बावड़ी है.उसके टेल में वे हिन्दू मूर्तियाँ पड़ी मिलेंगी जो इस्लामी हमलावरों ने मंदिर से उखाडवाकर उसमे फिकवा दी.पिधिओं से उस ईमारत से सलग्न फ़कीर,मुल्ला,मुजावर आदि तथाकथित मुसलमानों को यह समझ लेना चाहिए की उनके दादे परदादे उसी मंदिर के पुजारी आदि हिन्दू कर्मचारी रहे हैं जिसे आज वो निजामुद्दीन की कब्र समझ रहे हैं.यदि जीवित निजामुद्दीन के लिए कोई महल नहीं था तो मृत निजामुद्दीन के लिए महल कौन बनवाएगा?

Friday, October 21, 2011

वाह रे धर्मनिरपेक्षता

मुस्लमान वन्दे मातरम न बोले तो ये उन का धार्मिक मामला है
नरेन्द्र मोदी टोपी ना पहने तो ये उन का सांप्रदायिक मामला है


डेनमार्क में अगर कोई फोटो बन गयी तो उस का सर कलम
श्रीराम की जमीन पर अगर मंदिर बना तो हिन्दू बेशर्म


गोधरा में जो ५६ हिन्दू पहले जले वो भेड़ बकरी
और उस बाद जो मुस्लिम मरे वो देश के सच्चे प्रहरी


१५ साल पहले ही कश्मीर हो गयी हिंदुवो से खाली
देश की बढती मुस्लिम आबादी हमारी खुशहाली

पठानी सूत,, नमाजी टोपी में वो ख़ूबसूरत
हम सिर्फ राम कह दे तो आतंक की मूरत

Saturday, October 15, 2011

कुछ लोगों को गाँधीजी क्यों पसंद नहीं हैं?


1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।
2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा। 7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया। 8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।
11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।
14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
17.गाँधी ने गौ हत्या पर पर्तिबंध लगाने का विरोध किया
18. द्वितीया विश्वा युध मे गाँधी ने भारतीय सैनिको को ब्रिटेन का लिए हथियार उठा कर लड़ने के लिए प्रेरित किया , जबकि वो हमेशा अहिंसा की पीपनी बजाते है .
19. क्या ५०००० हिंदू की जान से बढ़ कर थी मुसलमान की ५ टाइम की नमाज़ ????? विभाजन के बाद दिल्ली की जमा मस्जिद मे पानी और ठंड से बचने के लिए ५००० हिंदू ने जामा मस्जिद मे पनाह ले रखी थी…मुसलमानो ने इसका विरोध किया पर हिंदू को ५ टाइम नमाज़ से ज़यादा कीमती अपनी जान लगी.. इसलिए उस ने माना कर दिया. .. उस समय गाँधी नाम का वो शैतान बरसते पानी मे बैठ गया धरने पर की जब तक हिंदू को मस्जिद से भगाया नही जाता तब तक गाँधी यहा से नही जाएगा….फिर पुलिस ने मजबूर हो कर उन हिंदू को मार मार कर बरसते पानी मे भगाया…. और वो हिंदू— गाँधी मरता है तो मरने दो —- के नारे लगा कर वाहा से भीगते हुए गये थे…,,, रिपोर्ट — जस्टिस कपूर.. सुप्रीम कोर्ट….. फॉर गाँधी वध क्यो ?
२०. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी लगाई जानी थी, सुबह करीब 8 बजे। लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी गई और शव रिश्तेदारों को न देकर रातोंरात ले जाकर ब्यास नदी के किनारे जला दिए गए। असल में मुकदमे की पूरी कार्यवाही के दौरान भगत सिंह ने जिस तरह अपने विचार सबके सामने रखे थे और अखबारों ने जिस तरह इन विचारों को तवज्जो दी थी, उससे ये तीनों, खासकर भगत सिंह हिंदुस्तानी अवाम के नायक बन गए थे। उनकी लोकप्रियता से राजनीतिक लोभियों को समस्या होने लगी थी। उनकी लोकप्रियता महात्मा गांधी को मात देनी लगी थी। कांग्रेस तक में अंदरूनी दबाव था कि इनकी फांसी की सज़ा कम से कम कुछ दिन बाद होने वाले पार्टी के सम्मेलन तक टलवा दी जाए। लेकिन अड़ियल महात्मा ने ऐसा नहीं होने दिया। चंद दिनों के भीतर ही ऐतिहासिक गांधी-इरविन समझौता हुआ जिसमें ब्रिटिश सरकार सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर राज़ी हो गई। सोचिए, अगर गांधी ने दबाव बनाया होता तो भगत सिंह भी रिहा हो सकते थे क्योंकि हिंदुस्तानी जनता सड़कों पर उतरकर उन्हें ज़रूर राजनीतिक कैदी मनवाने में कामयाब रहती। लेकिन गांधी दिल से ऐसा नहीं चाहते थे क्योंकि तब भगत सिंह के आगे इन्हें किनारे होना पड़ता.

Thursday, October 13, 2011

प्रशांत भूसन पर पड़े घूसों के मायने


मशहूर वकील और टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूसन पर भगत सिंह क्रांति सेना के सदस्यों द्वारा किया गया प्रतीकात्मक हमला,आज पुरे देश के सामने एक सवाल छोड़ गया है.क्या अपना विरोध जताने का यह सही तरीका है? एक सभ्य समाज में इसे कदापि सही नहीं माना जा सकता.लेकिन हमारे देश का दुर्भाग्य ही है की जब जब गाँधीवादी विचारधारा बढती है,देश को बाटने की बात होने लगती है.पहले पकिस्तान बनता है,फिर कश्मीर में अलगाववाद का समर्थन वो लोग करते हैं,जिन्हें देश का एक प्रबुद्ध वर्ग माना जाता है.अधिकतर लोग इस पुरे घटना क्रम पर न तो प्रशन भूसन का साथ दे रहे हैं और न ही उन तीन जवानों का,जिन्होंने यह कृत्य किया.लोग कहते हैं की इसका विरोध शांति पूर्ण ढंग से होना चाहिए.मै उन लोगों से पूछना चाहते हैं की बनारस में प्रशांत भूसन के बयां के बाद ,हमारी सरकारें,हमारे गाँधीवादी देश भक्त,और हमारा कानून कहाँ सोया था.इतने दिन तक प्रशांत भूसन पर कारवाई क्यों नहीं हुई?क्या अभ्व्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ भी बोला जा सकता है?एक तरह से प्रशन भूसन,यासीन मालिक की भाषा बोल रहे हैं.उनपर कारवाई कौन करेगा?वो सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील हैं,उनके खिलाफ केश कौन करेगा?हम सभी अन्नाजी की देशभक्ति का आदर करते हैं ओर उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का पूरा समर्थन भी लेकिन ज़रूरी नहीं कि उनकी टीम के सभी सदस्य भी उनके जैसे बेदाग सॉफ ओर ईमानदार हो. हम तालिबानी पागलपन के पक्ष में नहीं हैं परंतु भगतसिंघ की नीति पर चलने वालों की ज़रूर तारीफ करना चाहेंगे.
कोई भी हो,जो देश को बाटने की कोशिश करता हो,उसके साथ इस तरह का सलूक करने का विरोध नहीं होना चाहिए.केवल इन्दर वर्मा,तजिंदर सिंह बग्गा या विष्णु शर्मा ही ऐसा नहीं सोचते,यह २१ वि सदी का भारत है,यहाँ युवा जानते हैं की अगर प्रशांत भूसन जैसे सोच वालों के साथ शुरू में ही ऐसा सलूक नहीं किया गया,तो भारत में पुनः १९४७ का दुखद अतीत वापस आ जायेगा.क्योंको इनके पास मिडिया है पैसा है,नाम है,इनकी बातें लोगों तक आसानी से पहुच जाएँगी,लेकिन जो लोग वास्तव में देश के बारे में सोचते हैं,साधन के आभाव में उनकी आवाज़ गले में ही घुट कर रह जाएगी.जो देश को तोड़ने की कोशिश करते हैं,उनका सर तोड़ने में कोई हर्ज़ नहीं होना चाहिए.

दोस्तों इस जहाँ से गुजरता कौन है !
इश्क हो जाता है अपने वतन से करता कौन है !!
एक किनारे हम है एक किनारे खड़े वतन के गद्दार
अब देखना है बिखरता कौन है ?


**जय माँ भारती *जय हिंद*वन्देमातरम **

Saturday, October 8, 2011

हम राष्ट्रवादी हैं इसलिए हम आतंकवादी हैं!

हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा इतनी तेजी से बदल रही है की अगर कुछ वर्षों में इस्लाम इसकी पर्यायवाची बन जय तो कुछ भी संसय नहीं.अगर आज आप राष्ट्रहित की कोई भी बात करते हैं,तो आपको अल्पसंख्यक विरोधी बताना कांग्रेस और तथाकथित कुछ धर्मनिरपेक्ष पार्टियों की प्रवृत्ति बन गयी है.
आज जब संघ प्रमुख मोहन भागवत जी कहते हैं की अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम का हम समर्थन करते हैं तो अन्ना से इसपर सफाई मांगी जाती है.इसका मतलब हम क्या समझे?क्या संघ को भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम का विरोध करना चाहिए? हम तो हर उस चीज़ का समर्थन करेंगे जो हमारे राष्ट्रहित में है.अगर यह आन्दोलन कांग्रेस चलाती तो भी राष्ट्रवादी लोग उसका समर्थन करते.क्यूंकि यह एक ऐसा दीमक है जो पूरे राष्ट्र को खोखला कर रहा है.
आर.एस.एस. और वि.ही.प. अगर राष्ट्रहित में चलने वाले आन्दोलन को समर्थन करती है तो यह राष्ट्रविरोधी है और अगर अहमद बुखारी इसका विरोध करते हैं तो यह राष्ट्रहित में है.
ऐसा क्यों है,क्योंकि हम राष्ट्रवादी हैं इसलिए हम आतंकवादी हैं.जब हम कभी कहते हैं की लोकतंत्र के पवित्र मंदिर संसद में हमला करने वाले अफज़ल गुरु और मुंबई को लहूलुहान करने वाले कसाब को तुरंत फासी दी जनि चैये तो हमे अल्पसंख्यक और राष्ट्रविरोधी कहा जाता है और आतंकवादियों को समर्थन देने वाला सख्श देश भक्त हो जाता है और मुख्यमंत्री बन जाता है.ऐसा क्यों है,क्योंकि हम राष्ट्रवादी हैं इसलिए हम आतंकवादी हैं
ओसामा बिन लादेन को लादेन जी कहने वाले दिग्विजय,राजा जैसे घपलेवजों को समर्थन देने वाले दिग्विजय ,बाबा रामदेव जैसे देशभक्तों को ठग कहने वाले दिग्विजय तो सही हैं.इन चीजों का विरोध करने वाले हम गलत हैं.ऐसा क्यों है,क्योंकि हम राष्ट्रवादी हैं इसलिए हम आतंकवादी हैं
जब हम पूछते हैं की कश्मीर में कश्मीरी पंडितो को अपने ही घर में शरणार्थी बनाने वालों,सिक्खों को घटी छोड़ने वाले का फरमान जरी करने वालों को दंड क्यों नहीं दिया जा रहा है,तो हमें विद्वेषी कहा जाता है.ऐसा क्यों है,क्योंकि हम राष्ट्रवादी हैं इसलिए हम आतंकवादी हैं.

Friday, September 30, 2011

जिस दिन मेरी कलम झुके तुम मेरा शीश कलम करना


चाहे बोलो चीख रहा हूँ या बोलो चिल्लाता हूँ
चाहे बोलो चीख-चीख करके ताली बजवाता हूँ
कोई कुछ भी बोले मुझको इससे फर्क नहीं पड़ता
क्यूंकि जब तक स्वर्ग धरा का सचमुच स्वर्ग नहीं होता
तब तक यूही चीखूंगा ,तब तक यूहीं चिल्लाऊंगा
अपने भारत माँ की पीड़ा व्यथा वेदना गाऊंगा
अंतस में भूसन जागा लेखनी ज्वाल बन बैठी है
काली कर तलवार उठाकर महाकाल बन बैठी है
इसी लिए मेरी कविता के तेवर थोड़े तीखे हैं
तुम कविता मानों तो कविता,वरना केवल चीखें हैं
मै दर्दीले गीतों में भाषा श्रृंगार न भर पाया
यमक,श्लेष,अनुप्रास सरीखे चमत्कार न कर पाया
जब लिखने बैठा तो व्याकरणिक परिभाषा भूल गया
आततायी के आगे कविताई की भाषा भूल गया
जो न कभी भी छिप सकती है,मै ऐसी सच्चाई हूँ
कहीं चन्द,भूसन जगनिक हूँ,कही चंद्रवरदाई हूँ
हठी से कुचला जाये पर कवि की कलम नहीं डरती
कवि की कलम कभी सत्ता को डर कर नमन नहीं करती
मैंने भी कोशिश की है,कविता का धरम निभाने की
भूसन वरदायी दिनकर की परिपाटी अपनाने की
झूठ न बोलूँगा जुबान पर चाहे शोले धरवालो
अग्नि परीक्षा मेरे कलम की जब भी चाहो करवालो
गद्दारी करता दिखूं तो मुझपर नहीं रहम करना
जिस दिन मेरी कलम झुके तुम मेरा शीश कलम करना

Friday, September 23, 2011

किनसे पूछा?

जिन लोगों ने तुम्हे सलामी देने से इंकार किया
उनको राष्ट्राध्यक्ष मानकर क्यूँ तुमने सम्मान दिया?

हत्यारों को यहाँ बुलाने का उपाय कैसे सूझा?
उनको यहाँ बुलाने से पहले तुमने किनसे पूछा?

क्या उससे पूछा था जिसका बेटा कारगिल में सोया?
उजड़ी मांग से पूछा जिसका पति ताईगरहिल पर खोया ?

उस बहना से पूछा जो अपनी राखी न बांध सकी?
या उनसे पूछा जो अपना करवा चौथ न पार सकी?

गर पूछा होता तो वो कहते जवाब दे देने दो
जितने सैनिक खोये हैं सबका हिसाब ले लेने दो

रक्खो पूर्ण भरोषा अपने जल-थल-नौ सेनाओं पर
कह दो शुरू करें बमबारी दुश्मन की सीमाओं पर

जिस दिन सेना के स्वर में स्वर अपना आप मिला देंगे
कश्मीर क्या सैनिक पूरा पकिस्तान हिला देंगे

Sunday, September 18, 2011

अपने देश के गद्दारों को कैसे ना गद्दार लिखू?

चाहत है मेरे मन में भी ,हास लिखू श्रृंगार लिखू
गीत लिखू मै सदा गुलाबी,कभी नहीं मै खार लिखू
पर जब दुश्मन ललकारे तो कैसे ना ललकार लिखू?
अपने देश के गद्दारों को कैसे ना गद्दार लिखू
हमें बाटकर खोद रहे जो जाति धरम की खाई हैं
खुलेआम मै कहता हूँ वो नेता नहीं कसाई हैं
जो आपस में हमको बाटें उनका शीश उतारेंगे
ऐसे नेताओं को हम चुन-चुन कर गोली मारेंगे
मत भारती के दामन पर दाग नहीं लगने देंगे
अपने घर में हम मज़हब की आग नहीं लगने देंगे
हमने तो गुरूद्वारे में भी जाकर शीश झुकाया है
बाईबल और कुरान को भी गीता का मान दिलाया है
हम ख्वाजा जी की मजार पर चादर सदा चढाते हैं
मुस्लिम पिट्ठू वैष्णो देवी के दर्शन करवाते हैं
किन्तु यहाँ एक दृश्य देखकर मेरी छाती फटती है
पाक जीतता है क्रिकेट में यहाँ मिठाई बटती है
उन लोगों से यही निवेदन,वो ये हरकत छोड़ दें
वरना आज और इसी वक़्त वो मेरा भारत छोड़



Sunday, September 11, 2011

मुसलमान भारत से ज्यादा,बोलो कहाँ सुरक्षित हैं?



मुसलमान भारत से ज्यादा,बोलो कहाँ सुरक्षित हैं?


यदि आतंकी आंधी से अनमना न अपना मन होता

गीतों में राधा होती,गजलों में वृन्दावन होता

क्षत-विक्षत भारत ना होता,अधरों की लाली लिखता

लिखता भोर बनारस का और शाम अवध वाली लिखता

यदि भारत में उग्रवाद का धुआ नहीं छाया होता

तो मेरी कविता में भी,आक्रोश नहीं आया होता

यदि आतंकी शिविर ना सजते सीमा पर शैतानो के

तो उपदेश पढ़ा करते हम गीता और कुरानो को

होती ना हुनकर कंठ में,बस सरगम की ले होती

हर मंदिर हर मस्जिद में भी,भारत माँ की जय होती

पर कुछ मस्जिद और मदरसे,धरम स्वयं का भूल गए

उन्मादी होकर जेहादी आंधी में कूद गए

कुछ मस्जिद अड्डा बन बैठी है हथियार छुपाने की

कुछ के माईक से आवाजें हैं इस्लाम बचने की

ये आवाजें कैसी हैं,वे अब भी पूर्ण अशिक्षित हैं

मुसलमान भारत से ज्यादा,बोलो कहाँ सुरक्षित हैं?


मै अंगारे लिख बैठा


ऐसा नहीं की मुझे लुभाता,जुल्फों का साया ना था

या यौवन सावन ओढ़े मेरे द्वारे आया ना था

मुझको भी प्रेयसी की मीठी बातें अच्छी लगाती थी

रिमझिम-रिमझिम सब्नम की बरसातें अच्छी लगती थी

मुझको भी प्रेयसी पर गीत सुनाने का मन करता था

उसकी झील सी आखों में खो जाने का मन करता था

तब मैंने भी विन्दिया,काजल और कंगन के गीत लिखे

यौवन के मद में मदमाते,आलिंगन के गीत लिखे

पर जिस दिन भारत माता का,क्षत-विक्षत यह वेश दिखा

लिखना बंद किया तब मैंने,खंड-खंड जब देश दिखा

नयन ना लिख पाया कजरारे,तेज दुधारे लिख बैठा

भूल गया श्रृंगार की भाषा,मै अंगारे लिख बैठा


Wednesday, September 7, 2011

दिल्ली बिस्फोट- मरना तो आम आदमी की नियति है


इसमें कोई शक नहीं है की यह एक दुखद घटना है,लेकिन यह इतनी भी दुखद नहीं है की जिसके लिए हम आशूं बहायें.हमें तो आदत हो चुकी है बम बिस्फोटों में मरने की.कभी मुंबई में मरते हैं,कभी दिल्ली में.कभी जयपुर में मरते हैं तो कभी बनारस में.जम्मू कश्मीर का नाम तो मत लेना वहां तो रोज ही मरते हैं.तो फिर मरने जैसी इस छोटी सी घटना के लिए हम आशूं क्यूँ बहाए.हम तो आम आदमी हैं,कल से फिर अपने काम पर लौट जायेंगे.
मै इससे ज्यादा इस विषय पर नहीं लिख सकता.आखिर की बोर्ड का बटन दबाने में भी उर्जा ख़तम होती है,और मै यह भी जान चूका हूँ की मेरे लिखने से कुछ होने वाला नहीं है.आज हम चिल्लायेंगे कल चुप हो जायेंगे,तो चलो आप लोगों में से ही कुछ लोगों का विचार रखता हूँ.


फिर दिया अवसर आतंकियों ने हम भारतीयों को संवेदनाएं प्रकट करने/कराने का...
एक और आतंकी हमले को दिया अंजाम...
दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर धमाका...
तो शुरू कीजिये न सिलसिला भर्त्सना का...
सिर्फ दिखावी आक्रोश का..
वाह रे.! सुरक्षा तंत्र.??
जब संसद, हाई कोर्ट सुरक्षित नहीं राजधानी के
तो बाकी का क्या कहें.??
अब बयान बाजी शुरू होगी-
प्रधानमंत्री ...... हम आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देंगे ...
दिग्गी ...... इस में आर एस एस का हाथ हो सकता है
चिदम्बरम ..... ऐसे छोटे मोटे धमाके होते रहते है..
राहुल बाबा ..... हर धमाके को रोका नही जा सकता...
बम धमाका तो 20 जगह होना था
लेकिन हम ने बस एक जगह ही होने दिया
और इन सब की बीच में मृतक / घायल की कराह फिर से दब कर रह जाएगी !

क्यों हुआ ब्लास्ट.??
1 . सोनिया की एंट्री होने वाली है, वो आते ही हॉस्पिटल जाएगी और सारी हमदर्दी समेट लेगी.
2 . बहुत सारे नेता जेल जाने वाले है उनको रिलीफ देना है.
3 . बहुत सारे नेता जेल से मेडिकल जाँच के बहाने ३-४ महीने से गायब है उससे ध्यान ...भटकाने के लिए.
4 . आपको पता है कि दिल्ली पुलिस कहाँ थी?
अन्ना, बाबा रामदेव, केजरीवाल को नीचा दिखाने में ?
5 . 99% धमाके किसी न किसी नेता के इशारे पर होते है.

शुरेश चिपलूनकर जी कहते हैं -

1) बम ब्रीफ़केस में छिपाया गया था
2) अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग हुआ
3) पुलिस को हाई-अलर्ट कर दिया गया है
4) शांति-व्यवस्था बनाएं रखें
5) कोई सुरक्षा चूक नहीं हुई है
6) हम आतंकवाद से कड़ाई से निपटेंगे
7) हमें एकजुट रहकर आतंक का मुकाबला करना है
8) आतंकवादी हमारे जज़्बे को तोड़ नहीं सकते
ब्ला ब्ला ब्ला…
ब्ला ब्ला ब्ला…
ब्ला ब्ला ब्ला…
ब्ला ब्ला ब्ला…
कौन कहता है कि हमारी सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ सजग नहीं हैं?

संजय कौल जी कहते हैं-

क्या हम ने जीलत की मौत मर्रना है जो आज डेल्ही मई हुवा अगर यही है तो हमारा अंत निशित है............अगर नही तो हम को इस का जवाब देनाही पड़गा खून का बदला खून और मौत के बदले मौत ,,,,,,,,,जब तक हम इन को जावब नहीं तब हम जीलत की मौत ही मरगे ....कसम है माँ भरती की इस का जवाब ......आप लोउ के क्या विचार है .....मारा एक बी हिन्दू ( सनातनी धर्मी ) भाई मर्र्ता है मुझे एस्सा मसूस होता है की मर्रा आपने शरीर के टुकड़े हुवे है..........जब तक हम इन को जावब नहीं दे तब तक हमे हात पर हात नहीं रखना चाईए या खून का बदला खून और मौत के बदले मौत.......

राजीव चतुर्वेदी जी कहते हैं-

अब क्या दिग्विजय सिंह कहेंगे कि --" महान गांधीवादी चिन्तक दार्शनिक महामना ओसामा बिन लादिन की ह्त्या के पीछे हिंदूवादी संगठनों का हाथ है ?"
मै पूछता हूँ-
आतंक वाद कि स्थिति फुटबाल के मैदान कि तरह है, जिसमे भारत का कोई ऑब्जेक्ट गोल नहीं है या सही नेतृत्व नहीं है | आतंक वादी भारत के पाले में गेम खेलते है और भारत सिर्फ अपने पाले में कमजोर डिफेंस में गेम खeलता है | आतंकवादी भारत के पाले में /डिफेंस में आकर आसानी से गोले कर जाते है जबकि भारत उनके पाले में जाकर अटेक करने कि सोच सकता ही नहीं |
स्वाभाविक है कि अपने पाले में कमजोर डिफेंस के साथ विरोधी पाकिस्तान / इस्लामी आतकवाद को खेलाओगे तो वो विरोधी टीम आसानी से हमारे देश में गोल / धमाके करेगी | जरुरत है अच्हे नेतृत्व , अच्हे मजबूत डिफेंस और अटेक कि | अटेक पर उनके पाले में खेले |अटेक के लिए अर्जुन, कृष्ण ,रोनाल्डो , सुभाष चन्द्र बॉस , नरेंद्र मोदी जैसे खिलाडी चाहिए
| उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिले कि वो हमारे देश में आकर अटेक कि सोचे | उन्हें हमारे भारत के डिफेंस को तोड़ने का मोका ही मत दो, आतंकी बोल उनके पाले में ही रखो | निति अटेक पर रखो कि वो हमले कि सोचे ही नहीं |
भारत सरकार गद्दार पाकिस्तान से मित्तरता क्यों करती है ?
अपने बयान में राहुल जी और दिग्विजय बार बार इस्लामी / आतंकवादियों का साइड क्यों लेते है ?
कुछ ज्यादा तो नहीं लिख दिया?

Thursday, September 1, 2011

कांग्रेस जिंदाबाद?


माना
कि भारत को अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ाने के लिए लाखों लोगों ने जान दे
दी, पर होशियार वह होता है जो मौके का फायदा उठा ले और यह करामात कांग्रेस
के अलावा और किसे आती है? आये भी क्यों न.?
कांग्रेस की स्थापना सन 1885 में सर ए ओ ह्यूम ने की थी जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के एक डायरेक्टर के पोते थे !

शायद ईस्ट इंडिया कम्पनी क्रांतिकारियों के तेवर देख कर समझ गयी थी कि
भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं है इसलिए शांतिवार्ता और मध्यस्थता के लिए
कांग्रेस नाम का एक मंच बनाया गया!श्रद्धेय श्री श्री महात्मा गाँधी जो
अफ्रीका में अपने अपमान का बदला लेने के लिए भारत यात्रा पर निकले
थेउन्हें यह मंच पसंद आया और बाबू सुभाष चन्द्र बोस के कांग्रेस अध्यक्ष
चुने जाने पर खेद व्यक्त कर के नेहरु को अध्यक्ष बनवाया!रिश्तों के लिहाज
से जो क्रांतिकारी मदर इंडिया के लिए जान दे रहे थे उन्हें फादर इण्डिया
और अंकल इण्डिया मिल गए.सत्याग्रह
यह कि अगर अंग्रेज पूछें की तुम्हारे क्रन्तिकारी मित्र कहाँ छिपे हैं तो
उन्हें सब सत्य बता दिया जाये और जब अंग्रेज क्रांतिकारियों को काला पानी
या फांसी की सजा दें तो देश के गुस्से को अहिंसा के नाम पर चुप करा दिया
जाये!
अब
इतना अच्छा आन्दोलन करनेवाला ही भागते हुए अंग्रेजों से उनका ताज लेकर
अपने सर पहन सकता था न कि बम गोली चलने वाला क्रन्तिकारी, तो भाई आजादी का
सेहरा कांग्रेस के सर पहुँच गया!
टर्निंग
पॉइंट तब आया जब कैंसर की आखिरी स्टेज पर खड़े जिन्ना ने देश का पहला
प्रधानमंत्री बनने की जिद करी और दूसरी तरफ चाचा जी ने भी...तो
फादर इंडिया तो संत आदमी थे और उन्हें अपने होनहार भाई देश के चाचा जी पर
पूरा भरोसा था तो देश को अपने पुरखों की जागीर समझ कर दो हिस्से कर
डाले..
मुसलमानों
का पाकिस्तान और बाकी सब का हिंदुस्तान.!अब
चाचा जी ने देश सम्भाला और दलितों के मसीहा श्री श्री बाबा साहब आंबेडकर
को मुखिया बना कर विदेशियों के संविधान का भारतीय संस्करण बनवाया करवाया गया.??सरकारी नौकरी पर रखने से पहले शिक्षा दीक्षा और
चाल चलन की जाँच पड़ताल का प्रावधान रखा गयालेकिन संसद में बैठ कर देश
चलने के लिए क़ानून बनाने वालों को शिक्षा या अपराधिक रिकॉर्ड की जाँच से
मुक्त रखा गया.
यह बेवकूफ भूल गए कि बापू के 3 बन्दर थे-1. आँख बंद.. बुरा मत देखो..
चाहे जितने घोटाले या आतंकवादी हमले हों..2. बुरा मत सुनो..चाहे बाबा और
अन्ना के साथ लाखों लोग गरीबी, भ्रष्टाचार और लूट के धन के खिलाफ आवाज़
उठायें..3. बुरा मत बोलो ... अपने प्रधान मंत्री और आलाकमान को ही देख
लीजिये.
लेकिन
मेरे भाई बापू का चौथा बन्दर नहीं था जो अपने स्वयं के हाथ पकडे होता और
कहता बुरा मत करो......समझ गए न?हैं.अगर अब आपके दिमाग की बत्ती जल गयी हो तो बोलो-राष्ट्रीय अतिथि
अजमल कसाब की जय...महाबली नेताओं की जय...भारत माता..ओह सोरी...???फादर
इंडिया की जय..अंकल इंडिया की जय..विदेशी/स्वदेशी महारानी की जय.. युवराज
की जय..?
मैंने देश की एक विशेष पार्टी की यशगाथा का प्रयास किया हैताकि इन्टरनेट
से लोग भ्रमित न हों और उन्हें सही ज्ञान मिल सकेलेकिन किन बातों को
छुपाना चाहिए इस मामले में मैं अभी नासमझ हूँअतः अगर कुछ गलत लिख दिया हो
तो आपके प्रकोप के डर से पहले ही माफ़ी मांग रहा हूँ.??संभवतः आप मुझ
तुच्छ को माननीय कलमाड़ी और महामहिम ए राजा जैसे पराक्रमी लोगों के साथ
तिहाड़ में भेजने का कष्ट नहीं करेंगे..कांग्रेस जिंदाबाद..????

Monday, August 22, 2011

इमाम बुखारी का देशद्रोह उजागर,कहा - इस्लाम विरोधी है अन्ना का आंदोलन


दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी ने मुसलमानों से कहा है कि वे अन्ना के आंदोलन से दूर रहें। उनका कहना है कि अन्ना का आंदोलन इस्लाम विरोधी है क्योंकि इसमें वंदे मातरम और भारत माता की जय जैसे नारे लग रहे हैं। हालांकि रविवार को देश की प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्था दारुल उलूम, देवबंद ने गांधीवादी अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे के साथ होने का दावा किया था। दिल्ली की फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने अन्ना के आंदोलन का समर्थन किया है।

बुखारी ने कहा, ' इस्लाम मातृभूमि और देश की पूजा में विश्वास नहीं करता है। यह उस मां की पूजा की पूजा को भी सही नहीं ठहराता, जिसके गर्भ में बच्चे का विकास होता है। ऐसे में मुसलमान इस आंदोलन से कैसे जुड़ सकते हैं, जो इस्लाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। इसीलिए मैंने मुसलमानों को इस आंदोलन से दूर रहने को कहा है। 'बुखारी के इस आह्वान के बाद वंदे मातरम पर विवाद एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है।

हालांकि इस आंदोलन से प्रशांत भूषण और शांति भूषण जैसे शख्स जुड़े हैं, जिन्होंने गुजरात दंगे के मामले पर नरेंद्र मोदी काफी विरोध किया था। फिर भी शाही इमाम इस आंदोलन के आलोचक हैं। उनका कहना है कि देश के लिए करप्शन से बड़ा मुद्दा सांप्रदायिकता है और देश को इससे ज्यादा खतरा है। उन्होंने कहा, ' अगर अन्ना इस आंदोलन में सांप्रदायिकता को भी मु्द्दा बनाते हैं, तो मैं इस बारे में आश्वस्त हो सकता हूं। ' बुखारी ने अन्ना के आंदोलन को मिल रहे फंड के बारे में सवाल उठाया और आरोप लगाया कि अन्ना आरएसएस और बीजेपी के साथ मिले हुए हैं और राजनीति कर रहे हैं।

Wednesday, August 10, 2011

क्या लादेन हेडली कसाब जवाहिरी आतंकवादी हैं

१ - इस्लाम विगत १००० वर्षों से भारत व विश्व के लिए मुसीबत बन गया है विश्व के वे सभी देश जहां मुस्लिम रहते हैं इस्लाम से पीड़ित हैं । इस समस्या सेनिपटने के लिए हमें यह जानना होगा कि वास्तव में समस्या की जड़े कहां है व उनका समाधान किस प्रकार किया जा सकता है । इसी प्रकार इस लेख में हम यह जानने का प्रयास करेंगें कि इस समस्या को सुलझाने के लिए हिन्दुओं द्वारा अब तक क्या प्रयास किए गए है व उन प्रयासों का क्या प्रभाव हुआ है ।लेख को अधिक न बढ़ाते हुए सबसे पहले यह देखना होगा कि समस्या की जड़ कहां है ।
जो मुसलमान कहते हैं इस्लाम तो शांति का मजहब है वे यह बताए कि जब सारी दुनिया के मुसलमान इन बातों पर सहमत हैं कि इस्लाम ही एकमात्र सच्चा धर्म है http://www.islamhouse.com/p/289311 तो शांति कैसे आ सकती है ? अब वे यह बात क्यों कहते हैं या तो वे इस्लाम के मूल सिद्धान्त को नहीं जानते या फिर वे हिन्दुऒं को मूर्ख बनाने के लिए एसा कहते हैं । अन्य धर्मावलम्बयों को इस्लाम की शांति समझाने से पहले वे स्वयं आपस में एकमत हो जाएं । भारत के मुसलमानों को इस फतवे का जवाब देना होगा व यदि नहीं देते तो फतवे को ठीक मानकर हिन्दुऒं को जिहाद का जवाब देने के लिए तैयार हो जाना चाहिए । यह फतवा सभी सेक्यूलर कहलाने वाले नेताऒं के मुंह पर तमाचा है । इसे पढ़ने के बाद वे किस मुंह से इस्लाम की तरफदारी करेंगे? हिन्दुओं की मूल समस्या यह है कि वे जैसे स्वयं हैं इस्लाम व ईसाइयत को भी उसी श्रेणी में रखते हैं और इसी कारण वे आज तक इसलाम के हाथों मार खाते रहे हैं । : उक्त फतवे से यह स्पष्ट हो गया है कि मुसलमान किसी भी देश में अन्य धर्मावलम्बियों के साथ नहीं रह सकते हैं । सऊदी आरब की साइट इस्लाम हाउस में एक फत्वा इसी विषय पर लिया गया है ।

‘‘ क्या अन्य धर्मों की इस्लाम के साथ एकता स्थापित की जा सकती है ।”

इस फतवे को पढ़कर समस्त देशवासी जवाब दें कि क्या इस्लाम व मुसलमानों से कुरआन व शरीयत में एसी खतरनाक बातों के रहते विश्वास किया जा सकता है ? मुसलमान जवाब दें कि इनमें कौन सी बात वे भारत के मदरसों में नहीं पढ़ाते हैं ? क्या उन्होंने कुरआन व हदीस को संशोधित करके पढ़ाना शुरू कर दिया है ?यदि नहीं तो वे हिन्दुऒं के किसी भी प्रतिकार पर शोर मचाना बंद कर दें क्योंकि यह संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है कि प्रत्येक को अपनी व अपने धर्म की रक्षा करने का अधिकार है ( इस तथ्य को जानते हुए कि मुसलमानों ने सभी गैर मुसलमानों के विरूद्घ कलिमा को सर्वोच्च सिद्घ करने के लिए जेहाद छेड़ रखा है )। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस्लाम में अन्य सभी धर्मों को समाप्त करने की शिक्षा दी जाती है । सरकार मदरसों को दी जाने वाली समस्त सहायता बंद करे व सरकार से मांग की जाती है कि वह विद्वानों से इस्लाम का पूर्ण अध्ययन करवा कर एसी समस्त घृणा देने वाली आयतों को कुरआन में से निकाले । :
क्या अन्य धर्मों इस्लाम के साथ एकता स्थापित की जा सकती है के उत्तर में विद्वान मुल्ला का कहना है कि इस्लामी आस्था के मूल सिद्वान्तों में से एक यह है कि:
‘‘ धरती पर इस्लाम के सिवाय कोई दूसरा धर्म नहीं पाया जाता है और यह अंतिम धर्म हैं इसने अपने से पूर्व के सभी धर्म निरस्त कर दिए हैं । अतः पृथ्वी पर इस्लाम के अलावा कोई धर्म बाकी नहीं जिससे अल्लाह की इबादत की जाए । :
दूसरा यह कि कुरआन के आने के बाद सारी पूर्व पुस्तकें ( जैसे वेद रामायण इत्यादि ) कुरआन द्वारा खरिज कर दी गयी हैं । इसके बाद कहा गया है कि "उन लोगों के लिए हलाकत है, जो खुद अपने हाथों लिखी किताब को अल्लाह की किताब कहते हैं, और इस तरह दुनिया (धन) कमाते हैं, अपने हाथों लिखने की वजह से उन की बरबादी है, और अपनी इस कमाई की वजह से उन का विनाश है। व इसके बाद लिखी गयी सारी पुस्तकें जैसे रामचरितमानस, गुरू ग्रन्थ साहब इत्यादि बकवास हैं :
तीसरा यह कि मौहम्मद के अतिरक्ति कोई अन्य रसूल नहीं जिसकी पैरवी अब अनिवार्य हो इस समय यदि ईसामसीह, राम कृष्ण या हजरत मूसा भी पैदा होते तो उनके लिए यह अनिवार्य होता की वो अल्लाह पर व मौहम्मद पर ईमान लांए अर्थात मुलसमान बन जाए । :
पांचवी - यहूदियों और इन के अलावा अन्य लोगों में से जो जिसने भी इस्लाम स्वीकार नहीं किया है उसके कुफ्र का विश्वास रखना जिस पर हुज्जत अर्थात जो मेरे बारे में सुने पर फिर भी शरीयत पर ईमान न लाए उसके काफिर नाम देना अनिवार्य है । छंटी बात यह है कि ये लोग जो सभी धर्मों की एकता का ढोंग करते हैं ये इस्लाम को समाप्त करने के लिए ऐसा करते हैं :
सातंवी बात में यह स्पष्ट किया गया है कि इस एकता का उद्देश्य मुसलमानों और काफिरों के बीच घृणा के बंध को तोड़ देना है, फिर न तो (इस्लाम के लिए) दोस्ती और दुश्मनी बाक़ी रह जायेगी, और न धरती पर अल्लाह के कलिमा को सर्वोच्च करने के लिए युद्ध और जिहाद ही बाक़ी रह जायेगा । जो इस्लाम ग्रहण नही करते उनसे लड़ो जब तक कि वे जजिया न देने लगें । और अंत में कहा गया है कि अल्लाह का घर केवल मस्जिदें हैं । गिरजा घर और पूजा स्थल ( मंदिर, गुरूद्वारा इत्यादि ञ बल्कि ये ऐसे घर हैं जिनमें अल्लाह के साथ कुफ्र किया जाता है और उनके निवासी काफिर लोग हैं )। इसमें यह स्पष्ट किया है कि अल्लाह के कलिमा को सर्वोच्च करने के लिए जिहाद किया जा रहा है । :
शांति चाहने वाले मुसलमानों से यह अपेक्षा की जाती है कि या तो वे इस फत्वे के संबंध में अपना स्पष्टीकरण दें अथवा यदि कोई स्पष्टीकरण न हो तो इस्लाम को छोड़कर हिन्दू धर्म स्वीकार करलें ।
एक बात पर विचार करें । यदि एक एक बच्चे को बचपन से पढ़ाया जाता है कि अल्लाह व उसका पैगम्बर सबसे महान है । अल्लाह के अतिरिक्त किसी अन्य कोपूजना या अल्लाह के साथ किसी को पूजना दुनिया का सबसे बड़ा अपराध है । मौहम्मद पैगम्बर ने जो कुछ किया वो ठीक है उसमें कोई गलती नहीं हो सकती।मुसलमान अपने पूरे जीवन में वही कार्य करते हैं जो मौहम्मद ने कहा अथवा किया ।
अब आइए देखते हैं मौहम्मद पैगम्बर ने अपने जीवन में क्या क्या किया ।
1- मक्का पर विजय करते ही मौहम्मद पैगम्बर ने सबसे पहले काबे में घुसकर वहां पर मूर्तियों को तोड़ा ।
2- जो व्यक्ति अपनी पकड़ में आया उसे इस्लाम ग्रहण करने के लिए धमकाया ।
3- उसके बाद अपने आस पास के राज्यों के इस्लाम ग्रहण करने युद्ध करने अथवा जजिया देने तीनों में से एक को ग्रहण करने को कहा ।
यही सारा कार्य तो मुसलमान भारत में आज तक करते आए हैं ।
१- मुसलमानों ने हिन्दुओं के हजारों मंदिर इसी कारण तोड़े हैं ।
२- इसीलिए मुसलमान गैर मुसलमान को मुसलमान बनने के लिए विवश करते हैं ।
कश्मीर समस्या-
इसी प्रकार कश्मीर में क्या समस्या है इसे समझें । मुसलमानो ने भारत का बंटवारा 1947 मे करवाया ।कश्मीरी जनता भी दरअसल1947 में पाकिस्तान में अपने विलय का सपना देख रही थी । परतुं महाराजा हरिसिंह ने उनकी आशाओं के विपरीत भारत के साथ विलय पर हस्ताक्षर कर दिए । मुसलमानों का पाक स्थान ( पाकिस्तान ) में रहने का सपना समाप्त हो गया । अब मुसलमान सीधे तो भारतीय सेना से लड़ नहीं सकते थे । अतः उन्होंने कश्मीर को आजाद करने के लिए जिहाद का सहारा 1980 के दशक में लेना प्रारम्भ करदिया। कुरान में लिखा है कि सारी पृथ्वी अल्लाह की है । अब जब सारी पृथ्वी अल्लाह की है तो उसके जायज हकदार तो मुसलमान ही हुए । ( पैगम्बर मुहम्मद ने मदीना के बैतउल मिदरास में बैठे यहूदियों से कहाः ''ओ यहूदियों! सारी पृथ्वी अल्लाह और उसके 'रसूल' की है। यदि तुम इस्लाम स्वीकार कर लो तो तुम रक्षित रह सकोगे।'' मैं तुम्हें इस देश से निकालना चाहता हूँ। इसलिए यदि तुममें से किसी के पास सम्पत्ति है तो उसे इस सम्पत्ति को बेचने की आज्ञा दी जातीहै। वर्ना तुम्हें मालूम होना चाहिए कि सारी पृथ्वी अल्लाह और उसके रसूल की है''। (बुखारी, खंड ४:३९२, खंड ४:३९२, पृ. २५९-२६०, मिश्कत, खंड २:२१७, पृ.४४२)। ) अब मुसलमानों ने कश्मीर में अपनी भूमि छुड़वाने के लिए जिहाद शुरू कर दिया । उनके द्वारा फैलायी गयी हिसां के शिकार वहां के हिन्दू हुए जिन्हे अपना घरबार छोड़कर वहां से भागना पड़ा । इसी हिंसा का शिकार वहां के सुरक्षा बल के कर्मचारी भी हुए । इसी के कारण सेना के जवानों द्वारा वहां क्रोध वकामवासना का शिकार वहां की कुछ मुस्लिम बच्चे व महिलाएं हुई । जिन्हें उनकी प्रत्यक्ष गलती न होने के कारण भी बलात्कार या मृत्यु का शिकार होना पड़ा ( उनकी गलती केवल यह हो सकती है कि वे कुरान को सही मानती हैं इस बात को सही मानती है कि सारी पृथ्वी तो अल्लाह के रसूल की है तो उनसे मिलने वाले सभी मुसलमानों के मन में सुरक्षा बलों के प्रति अविश्वास की खाई और चौड़ी हो गयी । सुरक्षा बल की इन ज्यादतियों को देखते हुए मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को व मस्जिद में मुसलमानों को नफरत का पाठ पढ़ाया गया जिससे दोनों पक्षों की बीच की दीवारे इतनी चौड़ी हो गयी जिसे सुरक्षा बल द्वारा अपने किसी भी अभियान ( जैसे दवाइयां बांटने या कपड़े या मुसलमानों को किसी भी प्रकार की सहायता देने ) से समाप्त नहीं किया जा सकता ।
आतंकवादी कैसे बनता है ? माने एक बच्चा जिसकी उम्र 2 साल की है और वह मदरसे में जाना शुरू कर देता है । जहां उसे गैर मुसलमानों को नष्ट करने सारी दुनिया को इस्लाम में बदलने की शिक्षा दी जाती है । उसे बताया जाता है मूर्ति पूजा अथवा अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा सबसे बड़ा ( हत्या से भी बड़ा अपराध है ) यही बात सोचकर वह बड़ा होता है तो देखता है कि उसके पास जैसे पाकिस्तान या अफगानिस्तान में अमेरिकी फौन निरपराध नागरिकों की हत्या कर रही है। भारत में जन्म लेता है तो देखता है कि उसके भाई बहिनों के साथ कश्मीर और गुजरात में अत्याचार हो रहें हैं । मुस्लिम औरतों के साथ हिन्दू बहुल भारत में ( गुजरात व कश्मीर ) में बलात्कार किए जा रहे हैं । भारत में रहता है तो देखता है कि कई जगह उसके मुस्लिम होने के कारण उसे संदेह से देखा जाता है । ( यही कारण है कि अजहरूद्दीन जैसा व्यक्ति जिसे भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान तक बनाया गया यह कहता है कि उसके साथ मुसलमान होने के कारण सट्टेबाजी में फंसाया जा रहा है ) ये सारी बाते उसके दिमाग में विद्रोह को भर देती हैं और वह अपने भाई मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों के विरूद्ध जिहाद के लिए तैयार हो जाता है । वह बेचारा आत्मघाती बन जाता है वह विस्फोट करके अपने को उड़ा देता है । यही सारी बात हाल ही की फिल्म कुरबान में दिखायी गयी है । वह बेचारा कीट पतंगें की तरह है जो दीए की लौ में खुद ही भस्म हो जाता है । अब आप स्वयं फैसला करें कि क्या जो कार्य लादेन, हेडली, कसाब, जवाहिरी इत्यादि इस्लाम पीडि़त ( आतंकवादी ) लोग कर रहे है उसे किसी भी तरह से गलत ठहराया जा सकता है ।
सारी दुनिया मे इस्लाम फ़ैलाने के उद्देश्य से ही इस्लाम में गर्भ निरोधक को हराम बता दिया है । अब स्वयंविचार करें कि वह औरत जिसके पेटया गोदी में हर समय एक बच्चा हो वह क्या अपने घर के अलावा कुछ और सोचने की स्थिति में होगी ।
मुसलमान सारी दुनिया में वास्तव में सबसे दुखी कौम है । मुसलमान कहते हैं सारी दुनिया इस्लाम को समाप्त करने की साजिश कर रही है । वे ऐसा क्यों कहते हैं वे ऐसा इसीलिए कहते हैं क्योंकि वे खुद सारी गैर मुस्लिम दुनिया को समाप्त करके सारी दुनिया को इस्लाम के हरे रंग में रंगने की तैयारी कर रहे हैं । चूंकि वे खुद सारी दुनिया के हजार वर्ष से दुश्मन बनें हैं अतः उन्हें सारी दुनिया भी मुसलमानो की दुश्मन नजर आती है । दिया । अब हथियारों का उत्तर किसी भी दुनिया में अंहिसा से नहीं दिया जा सकता अतएव भारत सरकार ने भी मजबूरी में अपनी सेना को कश्मीर में लगाना पड़ा । अब लगातार 25 वर्षों से कश्मीर भारत से केवल सेना के बल पर ही रूका हुआ है अगर आज भारत सरकार कश्मीर से सेना हटा लेती है तो निश्चित रूप से कश्मीरी मुसलमान कश्मीर का पाकिस्तान में विलय कर देंगे ये मुसलमानों की मजबूरी है । कुरान व मौहम्मद के आदेश से मुसलमान इंकार कर नहीं सकते । इसीलिए वह कश्मीरी जिसकी प्रति व्यक्ति आय आतंकवाद के शुरू होने से पहले भारत में सबसे अधिक थी आज हजारों करोड़ की मदद से दाना पानी खा रहे हैं । अब जरा राष्ट्रवादी मुस्लिम की स्थिति पर भी विचार करें वह भारत के लिए सोचता है । कट्टरता से भी ग्रस्त नहीं है पर जब वह हिन्दुओं का व्यवहार देखता है कि सारे हिन्दू उसे संदेह की नजर से देखते हैं तो उसके दिल पर क्या बीतती होगी यह केवल वही जानता । उसी के दिल की व्यथा को भारतीय फिल्मों में दिखाया जाता है । कुरान की आयतों ने ही पूरे मुस्लिम व गैर मुस्लिम समाज को परेशान कर रखा है । मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच शत्रुता की खाई को तब तक के लिए खोद दिया है जब तक कि सारे गैर मुसलमान मुसलमान न बन जाएं । समस्या यह है कि कुरान नफरत के बीज फैला रही है और जब यह बीज बढ़कर गोधरा जैसे नरसंहार का कारण बनते हैं तो उसके प्रति नफरत फैलना दूसरे समाज के लिए स्वाभाविक है । परंतु यदि हम जड़ पर कोई प्रहार नहीं करेंगे तो इसी प्रकार के नरसंहार होते ही रहेंगे ।
आइए अब तस्वीर के दूसरे पहलू की ओर नजर करते हैं । गैर मुसलमान या अपनी समझ में जरा जल्दी आएगा हिन्दू इस्लाम से क्यों नाराज है

सारांश में हिन्दुओं को समझ में नहीं आता कि कश्मीर में आखिर जेहाद क्यो चलाया जा रहा वहां से कश्मीरी पंडितों को क्यों बाहर निकाल दिया गया है । गुजरात में गोधरा में क्यों आग लगायी गयी थी । मुसलमानों ने हिन्दुओ की हजारों मंदिर क्यों तोड़े । भारत में इतने विस्फोट क्यों किए जा रहे हैं । इसका कोई जवाब उन्हें नहीं मिलता । ऐसे हजारों वर्षों के लाखों कारणों की वजह से हिन्दुओं का गुस्सा कहीं कहीं बाहर फूट पड़ता है । जैसे गुजरात में गोधरा के बाद फूटा पर उस गुस्से का और उल्टा असर होता है और यही गुस्सा नए हजारों आतंकवादियों के बनने में उत्प्रेरक का कार्य करता है ।
मुसलमानों की गैर मुसलमानों से इस तरह के व्यवहार से सभी गैर मुसलमान परेशान हो चुके हैं । पर उसका इलाज उन पर गुस्सा करना नहीं है ।
अब आइए देखते हैं हिन्दुओं द्वारा भारत में अब इस्लाम से निपटने के लिए क्या क्या उपाय किए गए हैं अथवा हिन्दू क्या सोचते है ?
एक साधारण उपाय हिन्दु कहते हैं कि पाकिस्तान के आतंकवादी शिविरों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देना चाहिए । पर वह काम तो अमेरिका कर ही रहा है और उससे आतंकवाद के समाप्त होने का कोई निशान दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा है । लादेन के मरने से आतंकवाद समाप्त नहीं हुआ है। कुरान व हदीस में गैर मुसलमानों के विरूद्ध जहर के रहते मदरसे हर साल लाखों की संख्या में लादेन व उसके अनुयायी पैदा करते ही रहेंगे । हिन्दुओं द्वारा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अब तक जो इस्लाम की आंधी को रोकने के लिए किए गए कार्य किए गए उनमें सबसे पहले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 को हटाने का मुद्दा उठाया इसी के लिए अपना बलिदान दिया । पर उनके बलिदान के आज 50 वर्ष से भी अधिक बीत जाने के बावजूद धारा 370 हटाये जाने के कोई आसार नहीं हैं । न हीं समान नागरिक संहिता लागू करने के कोई आसार दिखाई देते हैं । उसके बाद राम मंदिर आंदोलन व हाल ही में कश्मीर में अमरनाथ मंदिर के लिए भूमि का आवंटन करने के लिए भी हिन्दुओं द्वारा आंदोलन किया गया है परंतु इन सभी आंदोलनों से समस्या की जड़ पर कोई प्रहार नहीं हुआ बल्कि इस्लाम का अपनी आबादी बढ़ाना और मदरसों द्वारा उस आबादी को कट्टर बनाने का कार्य निर्बाध रूप से जारी है । अब मान ले हम अपने उपरोक्त आंदोलन में सफल हो भी जाते हैं तो इन सबसे समस्या का समाधान किसी भी स्तर पर नहीं होगा । यदि राम मंदिर हिन्दुओं को अदालत के आदेश से मिल भी जाता है तो आने वाले समय में पुनः छिन जाएगा । अनुच्छेद 370 को हटा भी दिया जाता है तो आने वाले समय में पूरा भारत कश्मीर की तरह हो जाएगा व पूरे भारत से हिन्दुओं को कश्मीर की तरह से निकालने की साजिश की जाएगी । समस्या की जड़ तक पहुंच कर जब तक उस पर प्रहार नहीं किया जाएगा तबतक केवल इसकी फूल पत्तियों या टहनियों को काट कर को समाधान नहीं मिल पाएगा । जड़ के रहते वे फिर से आ जांएगी । अतः अब प्रहार सीधे जड़ पर करना होगा । और जड़ कुरान व हदीस में लिखें मौहम्मद पैगम्बर का संदेश है । अब इसका केवल एक ही उपाय है कि सारे गैर मुसलमान मुसलमानों से कहें कुरान में जो गैर मुसलमानों के विरूद्ध लिखा गया है उसे मानना अथवा कुरान को मानना ( अर्थात इस्लाम छोड़ दें ) बंद करें । मुसीबत को और बढ़ने से रोकने के लिए मुसलमानों की जनसंख्या पर तुरंत रोक लगाने का उपाय किया जाए । सारे गैर मुसलानों को इस प्रयास में युद्ध स्तर पर लग जाना चाहिए । अब इसका केवल एक ही उपाय दिखायी देता है कि सारे गैर मुसलमान मुसलमानों से कहें कुरान में जो गैर मुसलमानों के विरूद्ध लिखा गया है उसे मानना अथवा कुरान को मानना ( अर्थात इस्लाम छोड़ दें ) बंद करें । मुसीबत को और बढ़ने से रोकने के लिए मुसलमानों की जनसंख्या पर तुरंत रोक लगाने का उपाय किया जाए ।
एक गैर मुसलमान को जो प्रश्न मुसलमानों से पूछने चाहिए सारे गैर मुसलानों को इस प्रयास में युद्ध स्तर पर लग जाना चाहिए । एक गैर मुसलमान को जो प्रश्न मुसलमानों से पूछने चाहिए
1- सउदी अरब में मंदिर या चर्च बनाने की इजाजत क्यों नहीं है।
2- मौहम्मद साहब ने मक्का विजय के बाद काबा में मूर्तियों का क्यों तोड़ा था ।
3- मौहम्मद साहब व उनके बाद के इस्लामी शासकों ने अन्य देशों पर इस्लाम स्वीकार करने जजिया देने या युद्ध का विकल्प रखने के लिए क्यों संदेश भेजा था
4- कश्मीर से सारे कश्मीरी पंडितों किसने निकाला है।
5- गर्भ निरोधक क्यों हराम है ।
6- इन दोनों फतवों का क्या अर्थ है ।

१- क्या ग़ैर-मुस्लिम पर इस्लाम स्वीकार करना अनिवार्य है?
http://www.islamhouse.com/p/193702
२- धर्मों की एकता के लिए निमंत्रण का हुक्म
http://www.islamhouse.com/p/289311



Friday, July 8, 2011

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की संपत्ति पर सेकुलर(शर्मनिरपेक्षो ) की टेढ़ी नज़र:मंदिर के कुछ सच.


आज केरल(तिरुअनंतपुरम) का पद्मनाभ स्वामी का मंदिर पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है.यहाँ के तहखाने से अब तक लगभग १ लाख करों रुपये की संपत्ति मिल चुकी है जबकि एक दरवाजा अभी खुलना बाकी है.इस मामले पर देश के लोग कई धडो में बात गए हैं.कुछ इसे राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहते हैं तो कुछ इसे मंदिर की ही संपत्ति रहने देना चाहते हैं. यहाँ तक की कांग्रेस की अध्यक्षा माननीया अद्विनो अन्तोनियों मानिओ (सोनिया गाँधी) के साथ तमाम कांग्रेसी और तथाकथित सेकुलर राजनितिक पार्टिओं के लोग भी इसे सरकारी संपत्ति घोषित करने की बात कर रही हैं.जनता इस मंदिर के कुछ अज्ञात तथ्यों को जान सके,इसके लिए अपने थोड़े से ज्ञान से कुछ सामग्री एकत्रित किया हूँ,आशा करता हूँ,आपको मंदिर के बारे में जानने में उपयोगी सिद्ध होगा.
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राजा मर्तंड वर्मा ने त्रावणकोर राजधानी 1729 मे बनाई थी तब के पहले का यह मंदिर है | 1741 मे ईस्ट इंडिया कंपनी और डच लोगो ने कालीकट आने के 4 महीने मे ही इस मंदिर पर आक्रमण किया था | उस के बाद हर 10 साल बाद इस पर विफल ब्रिटिश आक्रमण होता रहा है | पहली लड़ाई बॅटल ऑफ कोलाचेल नाम से प्रसिध्ध है जो अंग्रेज हारे थे पर त्रावणकोर की प्रजा ने उदारता से अंग्रेज़ो को देशनिकाल नही किया था जो ग़लती अब सब मानते है | तब का रिलिजियस टॉलरंस गजब का था | यहूदी, मुस्लिम, हिंदू सब मिल कर अंग्रेज़ो से लड़े थे | बाद के गवर्नर जो भी यहां एटेक किया है या निसंतान मर गया है, खून हुवा है, युवा आयु मे रोग से मरा है ऐसा ही हुवा है | त्रावणकोर शायद भगवान पद्मनाभ और सोशियल हार्मनि की वजह से ही टिक पाया है | इस राज्य के लगातार 170 साल तक मुस्लिम दीवान रहे थे तब भी इस मंदिर का जजबा बना रहा था | सोनिया की उलटीमति शायद गांधीवंश नाबूद करने जा रहा है |
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गोआ की आज़ादी के वखत का सोना इंडिया ट्रिज़ेरी मे नही आ सका क्यू की "रूल ऑफ लेंड़" का क़ानून सब से उपर है | आज़ादी के वखत तिरुपति मंदिर की संपत्ति भी सरकार को नही मिली थी | आज़ादी के वखत इंडिया की तिजोरी मे 400 करोड़ थे जिस मे सरदार पटेल ने और बाबा भीमराव आंबेडकरने 64 करोड़ पाकिस्तान को दिए और 142 करोड़ अंग्रेज़ो को ले जाने दिए थे | अब सड़नली कोई प्रणाली भंग कर के फ़ैसला नही लिया जा सकता | यह नेचरल संपत्ति भी नही है | सरकार को दूर ही रहना चाहिए | वेटिकन की संपत्ति भी इटली इस्तेमाल नही करता उलटा इटली वेटिकन को हर साल खरबो डॉलर्स दान देता है | कांग्रेस सरकार इस मंदिर मे दान दे और अपना पाप कम करे
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ये पूरा मंदिर सालग्राम (शालिग्राम) पत्थर से बना है | आज असली शालिग्राम 1.75 लाख मे पोने इंच का मिलता है | जिसे मारवाड़ी लोग घर मे रखते है | रोज पूजा करते है | इसी पत्थर से मारवाड़ी लोग धनी बने है | अब इतने बड़े मंदिर मे 23 प्रकार के शालिग्राम स्टोन्स इस्तेमाल किए है उसकी कीमत कितनी होगी ? जो कोई राजा युध्ध मे हारता था या उसे विभाजन से खाली तिजोरी का राज्य मिलता था वो शालिग्राम पत्थर (जो विष्णु खुद है) ले आ के पुन; शक्ति और रूपिया पाता था | नही चलते धंधो को भी भगवान शालिग्राम न्याल कर देता है | यह आज भी सच साबित होता है | इस छोटे से पत्थर की और उसकी पूजा की राहुल को ज़रूरत है जो कोई इम्प्रेसिव काम नही कर पाया है न कोई कीर्ति बना पाया है | यह शालिग्राम रावण को नही पचा था और 1654 वर्ष की आयु मे राम से हार गया था | तब रावण ने 21 साल शालिग्राम अपने पास रखा था | कोई यह भी कहता है की रावण को मोक्ष चाहिए था और ग़लत कामो को यह शालिग्राम साथ नही देता इस लिए रावण ने जानबूज कर यह पत्थर अपने पूजा मे प्रयोग नहीं करता था .
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राजपरिवार का काली मिर्च व मसालो का कारोबार है . इस आखिरी तहखाने से लंबी सुरंग निकली है, जिसका एक सिरा वहां के राजा के महल और दूसरा समुद्र तक जाता है। मुझे लगता यह तहखाना राजा के कारोबार से संबंध रखता है, हो सकता है कि राजा इस रास्ते का उपयोग अपने कारोबार के लिए करता हो क्यों कि सुरंग का रास्ता राजा के महल से होते हुए समुद्र क़ी ओर जाता है, ज़रूरी पूजा पाठ के बाद इस तहख़ाने को अवश्य खोलना चाहिए . राजा क़ी असलियत सामने आ सके ओर दुनिया को सच्चाई [पता चल सके.
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विष्णु के 5 अवतार यही आसपास मे प्रगट हुवे थे | छठा अवतार परशुराम इस तहख़ाने से जुड़ा है जिस ने तीन बार सभी क्षत्रियो को मार दिया था | छठ चंद्र भी शत्रु कर्ज़ बीमारी हिंसा पराभव गुलामी भाड़ा षड्यंत्र गद्दारी तलाक़ अस्वस्थ बालक बांज कुदरती प्रकोप का है (मानो ईसाई पेंडोरा का दु:ख का पिटारा, जिसे खोलने से ग्रीस फिनिश हो हया था) | यह वास्तु पुरुष की नाभि का शुरुआती हिस्सा है जो उत्तरा फाल्गुनी, हस्त ओर चित्रा नक्षत्र को बिलोंग करता है जिस का मतलब समंदर मे संपत्ति सहित बिना कोई लीडर खो जाना | इसी को स्प्ररेंट (नाग) का मध्य हिस्सा कहा गया है जो देश को स्थिरता देता है | अस्थिरता लाना हो तो मंदिर की मिल्कियत को लुंट लो यह विद्वानो की राय है | जिस की कॉपी सुप्रीम कोर्ट को फेक्स की गयी है |
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राज फेमिली को आज भी सरकार पेंशन देता है | उनके महलो को राष्ट्रीय संपति नही बनाया है | इस से अधिक धन स्विस बेंक मे है जिसे राष्ट्रीय संपत्ति बनाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट दे चुका है पर मनमोहनसिंग सोनिया राहुल सहमत नही है (नेहरू गांधी ट्रस्ट की संपत्ति) इस लिए कोई प्रयास नही किए है | ऐसे मे यह मंदिर का धन कैसे लोगो का हुवा ? लोगो को हराम का खाने की आदत बंद करके खुद की अकल ओर हाथो की ताक़त से संपत्ति बनानी चाहिए | पद्मनाभ यह रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क भी है जिस की कीमत भी बड़ी होगी| पर 2जी की 122 लाइसेसे कंपनियां इस से ज़्यादा सिर्फ़ दस साल मे कमानेवाले है | हज़रत ख्वाजा मुद्दीन चिस्ती की दरगाह को भी अगर कांग्रेस लोगो की मिल्कियत गिनना चाहे तो वो नही हो सकता | हज़रत ख्वाजा मुद्दीन चिस्ती भगवान पद्मनाभ से भी अमीर है |
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यह मंदिर अदभूत है | हम गये थे तब एक दिन ओर रुके थे | सामान्य मंदिर की तरह तोड़ा चलने पर गुंबज शुरू होता है ऐसा नही है | लंबा रास्ता करीब 10 मिनट चलो तब गुंबज आता है | तब तक अंधेरा बढ़ते जाता है | प्रकाश व्यवस्था कुदरती है पर अंधेरा अंधा नही बनाता | धीरे धीरे हम नीचे जा रहे है ऐसा प्रतीत होता है पर कोई स्टेप उतरने का नही है आसान ढलान है | ढलने से मंदिर की उंचाई बढ़ती जाती है | स्वच्छ हवा दिमाग़ को ताज़ा कर देती है | हम कब समंदर के अंदर है यह पता नही चलता जब तक ठंड न लगे | शेषनाग पर लेटे काले विष्णु की तसवीर सभी ने पुस्तको मे देखी होगी वो यही की है | एक ही स्टोन से 18 मंज़िल जितना आड़ा विष्णु लेटा है | मंत्रमुग्ध या वशीकरण लगता है | सब शांत हो जाता है | हार्ड्ली किसी को डर लगता है | ध्यान से सुनो तो समंदर की टकराती लहरो के बीच आप हो यह एहसास होता है | दो पत्थरो के बीच कोई मिट्टी या सीमेंट नही लगाया है बस यू ही पत्थर पे पत्थर चढ़ाया है फिर भी लीकेज नही है | सभी को धोती पहननि ज़रूरी है .धोती बहार फ्री पहने मिलती है बाद मे लौटा दो | महिलाए यू ही जा सकती है | कुछ मुस्लिम ईसाई लोग भी दिखे थे जो रेगयुलर भक्त थे | कोई डोनेशन नही देना पड़ता न कोई टिकट लेना पड़ता है | जूते संभालने टोकन प्रथा है पर वो भी मुफ़्त है | सेवको ने मंदिर को सॉफ रखा है | वास्तु के देव मानसारा, मयामंतम ओर विश्वकर्मा ने यही भगवान से दीक्षा ली थी जो छोटे स्टोन का मुल मान कर यह मंदिर बनाया है|किसी ने समुद्रमंथन यही हुवा था ऐसी जानकारी दी |विष्णु जो तत्व के देव है उन्हो ने मनु को पदार्थ (मिनरल्स) का ग्यान यही दिया है|आसपास की दीवारे भी मूर्तियो से लदी है|एक कछुआ भी है जो विष्णु की राह मे पत्थर बन गया था| कोई पैसो का दिखावा नही है सब सादे पुजारी है कोई पूजा का आग्रह नही है पर पास के झरने पर 100 लोग शांति से पूजा करते दिखाई देते है|पूजा फीज़ का आग्रह नही है|पैसे कम हो तो भी पूजा मे बैठ सकते है |प्रसाद मे पूरा खाना मिलता है वो भी फ्री है|ज्योतिष् भी फ्री मे देखी जाती है|रोज की तकलीफे लोग यहां भूल जाते है|

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पद्मनाभस्वामी का खजाना इन से बचाना नही तो इटली चला जाएगा, क्वतरोची मामा आ रहे है.

Saturday, July 2, 2011

एक आह्वान

हे नौजवान आंखे खोलो,भारत माँ तुम्हे पुकार रही.
अपनी मर्यादा रखने को,गंगा-सतलुज ललकार रही.
हर तरफ यहाँ है अनाचार,पापी राजा बन बैठे हैं.
मेहनतकश भूखो मरते हैं,इनके बस जाम छलकते हैं.
राजा,कलमाड़ी-कनिमुडी,अरबों खरबों खा जाते हैं.
पर बारह सौ के वेतन पर,हम सुखी लोग कहलाते हैं.
कहने को हम हैं सवा अरब,पर यही बात चुभ जाती है.
इतने लोगों के रहते भी,एक विदेशन राज चलती है.
अब लालबहादुर कहीं नहीं,हर जगह यहाँ मनमोहन हैं.
निर्विकार से बैठे हैं,इनपर किसका सम्मोहन है?
भ्रष्टाचार ख़तम कर दो,कह जनता जब चिल्लाती है.
आधी रात में जनता पर,सरकार गोली चलवाती है.
रामदेव-अन्ना जैसे को,देशद्रोही ये कहते हैं.
जनता भले चीत्कार करे,ये घर में दुबके रहते हैं.
हम यहाँ चंद रुपये के खातिर,दिन भर मेहनत करते हैं.
पर भ्रष्टाचारी बैठ यहाँ,अपनी तिजोरी भरते हैं.
जब तक दिग्गी जैसे कुत्ते,भोऊ-भोऊ करके चिल्लायेंगे.
तब तक सिब्बल जैसे नेता,जनता की वाट लगायेंगे.
हे मेहनतकश,अब तो समझो,बस यही हमारे शोषक हैं.
ये संघ शक्ति से डरते हैं,ये सिम्मी के परिपोषक हैं.
हे नौजवान बन भगत सिंह,फिर से रणभूमि में आओ.
भारत को पुनः आजाद करो,इस समरभूमि में बढ़ जाओ.

-राहुल पंडित

Thursday, June 9, 2011

राष्ट्रवादियों की जरुरत : स्वामी रामदेव का साथ



विगत कई महीनों से हिन्दुत्व समर्थकों में चर्चा का विषय था कि २०१४ में किसे वोट देना चाहिए । सभी कहते थे कि देखा जाएगा जैसी परिस्थिति बनेगी । पर भाजपा के स्वामी रामदेव के समर्थन में आने के पश्चात ऐसे प्रश्नों पर विराम लग गया है । भाजपा ने अपने सत्ता में आने के बाद जिस प्रकार से हिन्दुऒं को निराश किया था उस सारी निराशा को स्वामी ने रामदेव ने समाप्त कर दिया है । संघ विचार परिवार ने पिछले ८६ वर्षों की साधना की थी हिन्दुत्व के समर्थन में जो माहौल तैयार किया था उसे केवल एक सक्षम नेत़ृत्व की तलाश थी जो स्वामी रामदेव के रूप में पूरी हुई ।

भाजपा के नाकारापन के कारण राष्ट्रवादी लोग बड़े ही असमंजस की स्थिति में थे । भाजपा के मध्य में आज भी आमराय यह है कि उग्र हिन्दुत्व के कारण ही लोग भाजपा से कट रहे हैं इसीलिए उसे ऐसे मुद्दों को नहीं उठाना चाहिए । आज भी भाजपा में जाति गत आधार पर टिकट बांटे जा रहे हैं पर भाजपा इस परिस्थिति को नहीं देख रही कि यदि मुस्लिम जनसंख्या इसी तरह से बढ़ती रही तो आगामी दस या बीस वर्षों के बाद सभी जगह भाजपा के जातिगत समीकरण फेल हो जाएगें । भाजपा को दो बार बढ़िया जीत हासिल हुई एक बार ढांचे के विध्वंस के बाद व दूसरी बाद कारगिल संघर्ष के बाद । दोंनो बार भाजपा की जीत हिन्दुत्व व राष्ट्रवाद के आधार पर हुई । भाजपा को स्वामी रामदेव से भी सबक लेना चाहिए । केवल योग के आधार पर स्वामी रामदेव ने लोकप्रियता हासिल नहीं की । जनता भाजपा में नरेद्र मोदी जैसा सक्षम नेता चाहती थी पर भाजपा नेताऒं के आपसी मतभेद के चलते नरेद्र मोदी को आगे नहीं आने दिया । जिसका नुकसान अब भाजपा को उठाना पड़ रहा है कि हजारों नेताओं की पार्टी भाजपा को पर स्वामी रामदेव के समर्थन में आना पड़ा । आज भी स्वामी रामदेव के भारत स्वाभिमान में जो लोग कार्य कर रहें हैं वे उनमें से ९५ प्रतिशत संघ के विचार परिवार से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष कहीं न कहीं जुड़े हुए होगें । आखिर भाजपा की क्या मजबूरी हो गयी की उसे रामदेव के समर्थन में आना पड़ा । दरअसल भाजपा के कुछ प्रतिशत उच्च नेताऒं को छोड़कर सभी कार्यकर्ता राष्ट्रवाद व हिन्दुत्व के कारण ही भाजपा के साथ हैं । यदि भाजपा रामदेव का साथ न देती तो भाजपा के बहुत से कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर स्वामी रामदेव के साथ चले गए होते । अब समय भाजपा के हाथों से चला गया है । जिस प्रकार से आपात्काल के समय जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में कार्य किया गया था अब समय स्वामी रामदेव के नेतृत्व में कार्य करने का आ गया है ।

Friday, May 20, 2011

पालीताणा की हुतात्मा

गुजरात का छठवां सुल्तान महमूद बेगड़ा बड़ा क्रूर, निर्दय, धर्म द्रोही और दुर्दान्त शासक था। वह भयंकर हिन्दू विरोधी था। इसने अपने राज्य का बड़ा विस्तार किया। यह ऐसा भोजन भट्ट था कि इसके खाने की मात्रा को लेकर पूरे देश में अनेक किंवदन्तियां प्रचलित हो गई थीं। प्रसिद्ध उपन्यासकार वृन्दावनलाल वर्मा के अनुसार वह १५० केले, एक सेर मक्खन और एक सेर शहद तो जलपान में ही लेता था और पूरे दिन में लगभग एक मन अन्न खाता था। इसी महमूद बेगड़ा ने पावागढ़ और जूनागढ़ के किले जीत लिए। इन दोनों स्थानों और अपनी सेना के मार्ग में पड़ने वाले हिन्दू मंदिरों को उसने तोड़ डाला। निर्ममतापूर्वक हिन्दुओं का कत्लेआम करवाया और फिर उसकी सेना पालीताणा की ओर बढ़ने लगी। पालीताणा में जैनों का प्रसिद्ध तीर्थराज शत्रुंजय स्थित है। बेगड़ा उसी विशाल मंदिर को तोड़ने आ रहा था। पालीताणा के लोगों तक यह समाचार पहुँचा तो वे काँप गए। जैनों की एक बड़ी सभा हुई। शत्रुंजय को बचाने के उपाय सोचने लगे परन्तु उस दुर्दान्त आततायी के हाथों मंदिर को बचाने का कोई उपाय समझ में नहीं आया। जैन समाज किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया। किसी बुद्धिमान जैन सज्जन ने कहा कि अब तक इस संकटकाल में शत्रुंजय की रक्षा केवल पालीताणा के ब्रह्मभट्ट ही कर सकते हैं। पालीताणा के ब्रह्मभट्ट बड़े धर्मप्राण, विद्वान्‌, संघर्षशील और हठी के रूप में प्रसिद्ध थे। जैन समाज के सभी संभ्रान्त जनों ने ब्रह्मभट्टों की शरण ली और उनसे अपने तीर्थराज को बचाने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि इस आततायी सुल्तान की सेना के सम्मुख हम जैन असहाय हैं। आप जैसे विद्वान्‌ और धर्मरक्षक हमारे तीर्थ की रक्षा कीजिए। ब्रह्मभट्टों ने उन्हें शत्रुजय की रक्षा का वचन दिया और सबसे वृद्ध ब्रह्मभट्ट ने उन्हें धर्म पर अपना बलिदान करने को प्रेरित किया। अहिंसक विरोध के द्वारा तीर्थराज की रक्षा का निश्चय हुआ क्योंकि रक्तलोलुप, धर्मद्रोही, क्रूर सेना का सशस्त्रु विरोध कोई अर्थ नहीं रखता था।
दूसरे दिन निश्चित समय पर पालीताणा के एक हजार ब्रह्मभट्ट शत्रुंजय की तलहटी में एकत्रु हुए। प्रत्येक बलिदानी ब्रह्मभट्ट श्वेत अंगरखा पहले चंदन चर्चित भाल और गले में रुद्राक्ष की माला धारण किए था। सबकी कटि में कटारें थीं। सुल्तान बेगड़ा को इन दृढ़ निश्चयी ब्रह्मभट्टों के तलहटी में एकत्रु होने का समाचार मिल गया। अब बिना मंदिर तोडे आगे बढ़ना उसे अपना अपमान लगा। वह सेना सहित तलहटी में पहुँचा। सबसे आगे घोड़े पर सवार बेगड़ा मंदिर की सीढ़ियों के नीचे तक चला आया। सर्वाधिक वृद्ध ब्रह्मभट्ट ने आगे बढ़कर उसकी प्रशंसा की और उससे ब्रह्मभट्टों के सम्मान की रक्षा का आग्रह किया परन्तु धर्मद्रोही बेगड़ा इसे सुनकर और अधिक क्रोधित हो गया। उसने सैनिकों को उस वृद्ध को घसीट कर रास्ते से हटाने का आदेश दे दिया। सिपाही आगे बढ़े परन्तु जब तक वे उस पवित्र वृद्ध का शरीर छूते उसने ÷जय अम्बे' का वज्रघोष किया और कमर से कटार निकालकर अपने पेट में घोंप ली। रक्त का फव्वारा फूट पड़ा और खून की कुछ बूंदे सुल्तान के चेहरे पर भी पड़ीं। उस हुतात्मा के मृत शरीर को बगल में छोड़कर सुल्तान आगे बढ़ने को तत्पर हुआ तभी अगली सीढ़ी पर खड़े दूसरे ब्रह्मभट्ट ने 'जय अम्बे' का प्रचण्ड उद्घोष कर कटार निकाल कर अपने पेट में घोंप ली। सुल्तान एक बार तो हतप्रभ रह गया और उसकी गति रुक गई। वजीर ने उसे ब्रह्मभट्टों की धर्मप्राणता और हठधर्मिता के विषय में समझाया। परन्तु अपने मुल्ला-मौलवियों का रुख देखकर सुल्तान मानने को तैयार नहीं हुआ। उसका अनुमान था कि दो-चार लोगों के मरने पर ब्रह्मभट्ट भयभीत होकर वहाँ से चले जाएंगे। वह आगे बढ़ा परन्तु तीसरी सीढ़ी पर एक कोमल कमनीय काया, कामदेव के सौन्दर्य को अपनी सुन्दरता लजाने वाला हँसता हुआ दृढ़ निश्चयी षोडष वर्षीय किशोर खड़ा था। सुल्तान जब तक उसके पास पहुँचे उसने 'जय अम्बे' का उद्घोष किया और कटार पेट में घोंप ली। उसके गर्म रक्त से सुल्तान सिर से पाँव तक नहा गया।
यह अकल्पनीय दृश्य देखकर सुल्तान महमूद बेगड़ा का कलेजा हिल गया। वह भीतर तक काँप गया। इन हुतात्माओं की आत्माहुति ने उसे झकझोर दिया। वह पीछे लौटा और उसने अपने सरदारों को आदेश दिया कि मार्ग में खड़े सभी ब्रह्मभट्टों को कैद कर लिया जाए। सुल्तान का आदेश का पालन करने के लिए उसका सरदार खुदाबन्द खान जैसे ही आगे बढ़ा कि एक सत्तर वर्षीय वृद्ध ने कटार से अपना पेट चीर डाला और अपनी आँतों की माला खुदाबन्द खान के गले में डाल दी। बौखलाकर सरदार ने माला अपने गले से उतार दी और अगली सीढ़ी पर खड़े जवान को पकड़ने को आगे बढ़ा। जब तक खुदा बन्दखान उसके पास पहुँचे कि उसने वज्रनिनाद में ÷जय अम्बे' का घोष किया और कटार अपने पेट में घोंप ली। अब स्थिति यह हो गई कि ज्यों ज्यों बौखलाकर खुदाबन्द खान अगली सीढ़ी की ओर बढ़ता कि वहाँ खड़ा ब्रह्मभट्ट कटार से अपनी आत्माहुति दे देता था। इस तरह ८ लोगों ने बलिदान कर दिया। ब्रह्मभट्टों के इस रोमांचकारी अकल्पनीय आत्म बलिदान को देखकर खुदाबन्द खान भी काँप गया। वह पीछे लौटा और उसने सुल्तान बेगड़ा से लौट चलने की प्रार्थना की। क्रोधित और दिग्भ्रमित सुल्तान ने अपने खूंखार, निर्दयी और पाशविक वृत्तियों वाले सैनिकों को छाँटकर सभी ब्रह्मभट्टों को मारने का आदेश दिया। अब शत्रुजय की सीढ़ियों पर 'भूतो न भविष्यति' जैसा महान्‌ दृश्य था। महमूद के सैनिक जिस सीढ़ी के पास पहुँचते उसी पर खड़ा ब्रह्मभट्ट 'जय अम्बे' का तुमुलनाद कर आत्माहुति दे देता। इन वीर हुतात्माओं के इतने शव देखकर सुल्तान बेगड़ा घबरा गया। उसी समय एक ग्यारह वर्षीय सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति वहाँ आई और उसने सुल्तान बेगड़ा की भर्त्सना करते हुए उसे धिक्कारा। उसने कहा! दुरात्मा महमूद तू तो गुजरात का पालक था फिर तू ही घातक कैसे बन बैठा। तूने अपनी धर्मप्राण जनता के खून से अपना कुल कलंकित कर लिया। यदि अभी भी तेरी प्यास नहीं बुझी तो देख एक हजार पालीताणा के और हजारों की संख्या नीचे तलहटी में खड़े ब्रह्मभट्ट अपना बलिदान देने को तत्पर खड़े हैं। ऐसा कहते-कहते उस बालिका ने 'जय अम्बे' का जयघोष करके अपने हाथों से अपना मस्तक उतार कर फेंक दिया। इस असीम साहस की प्रतिमूर्ति नन्हीं बालिका की आत्माहुति देखकर सुल्तान काँप गया। उसके साहस ने जवाब दे दिया। उसने काँपते कण्ठ से अल्लाह से अपने अपराध की क्षमा याचना की और सेना को लौट चलने का हुक्म दिया। उसी दिन से महमूद बेगड़ा ने अपने राज्य मे किसी भी धर्म के धार्मिक स्थल को नष्ट करने पर प्रतिबंध लगा दिया।
शत्रुंजय तीर्थराज में १०७ ब्रह्मभट्टों और एक कुमारी ने स्वेच्छा से आत्माहुति दी थी। उसी दिन से जैन समाज ने शत्रुजय की फरोहिती पालीताणा के ब्रह्मभट्टों को सौंप दी। शत्रुंजय का यह तीर्थराज आज भी हुतात्मा ब्रह्मभट्टों की जयकथा कह रहा है।

Tuesday, May 10, 2011

पहले यह देश महान हुआ करता था

पहले यह देश महान हुआ करता था
संसार में इसका नाम हुआ करता था
पर अब तो सब उल्टा-पुल्टा होता है
जनता भूखो मरती है,नेता सोता है
सड़ता है अनाज सभी भण्डारो में
पर भनक नहीं है सत्ता के गलियारों में
पहले श्री रामचंद्र आदर्श हुआ करते थे
रावन दुबके-छुपके घुमा करते थे
पर आज हालात बहुत बदतर हैं
राम नहीं हैं,रावन ही दर-दर हैं
सीता दुबकी हैं जंगल,झाड कछारों में
सूर्पनखा का राज सभी गलियारों में
जनता उलझी आश्वाशन के जंजालों में
नेता उलझे हैं खरबों के घोटालों में
राजा-कलमाड़ी जैसों की चांदी है
रामदेव जैसों की बर्बादी है
माया की माया में उलझी जनता है
जनता भूखी,हर तरफ पार्क बनता है
कहता राहुल-हे प्रभु,बचाओ हम सब को
बीते व्यतीत में पंहुचा दो फिर भारत को.
-राहुल पंडित

Tuesday, May 3, 2011

साबित हुआ पाकिस्‍तान ही आतंकियों की शरणगाह, अब बनेगा अमेरिका का निशाना?


अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन पाकिस्‍तान की राजधानी इस्‍लामाबाद से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर (अबोटाबाद में) मारा गया। वह एक आलीशान हवेली में था। इससे भारत की वह बात पुख्‍ता साबित हुई है, जिसमें वह कहता रहा था कि लादेन पाकिस्‍तान में ही छिपा है। भारतीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा भी कि ओबामा के ऐलान से यह साबित हो गया कि पाकिस्‍तान ही आतंकवादियों का पनाहगार है। अब दुनिया भर को इंतजार है इस पर अमेरिका की प्रतिक्रिया की।

पाकिस्‍तान हमेशा लादेन के पाकिस्‍तान में होने की बात को गलत बताता रहा। पर अब उसकी पोल खुल गई है। आतंकवादियों को खत्‍म करने के लिए किए जाने वाले अमेरिकी ड्रोन हमले का भी पाकिस्‍तान विरोध करता रहा। तो क्‍या वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का सबसे भरोसेमंद सहयोगी बनने का दिखावा कर वास्‍तव में आतंकवादियों का साथ दे रहा था? इस सवाल पर अब अमेरिका को सोचना है।

हालांकि अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने ओसामा की मौत का ऐलान करते वक्‍त पाकिस्‍तान के खिलाफ कोई बात नहीं कही, लेकिन आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले इस मुल्‍क पर अमेरिका का रुख अब निश्चित तौर पर पहले जैसा नहीं रहेगा। उन्‍होंने ओसामा की मौत के लिए जिनका शुक्रिया अदा किया, उसमें पाकिस्‍तान का नाम नहीं लेकर ओबामा ने शायद इसका संकेत दिया है।

पाकिस्‍तान को भी कुछ सूझ नहीं रहा है। शायद तभी ओसामा की मौत की खबर सार्वजनिक हो जाने के कई घंटे बाद तक भी पाकिस्‍तान का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। करीब दो घंटे बाद शेरी रहमान की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई। उन्‍होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया और पाकिस्‍तान की आतंकवाद के प्रति सख्‍त रवैये की जीत बताया। लेकिन वह ओसामा के पाकिस्‍तान में ही होने पर कुछ ठोस नहीं बोल सकीं।

आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर अमेरिका से अरबों डॉलर पाकिस्‍तान ठग चुका है। अब शायद यह खैरात भी बंद हो और तंगी से जूझ रहे पाकिस्‍तान की माली हालत और खराब हो। अगर अमेरिका ने उसे मदद बंद कर दी तो यह भी पाकिस्‍तान पर बड़ी चोट होगी।अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने 2 साल पहले भी खुलासा किया था कि लादेन पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी कबिलाई इलाके में छिपा हो सकता है। ये वही इलाका है जहां अमेरिकी ड्रोन कहर बरपाते रहे हैं। इसके बावजूद पाकिस्‍तान ड्रोन हमले का विरोध करता रहा। ड्रोन हमले को लेकर पाकिस्‍तान-अमेरिका संबंध में पिछले कुछ समय से तनाव चरम पर आ गया था।

एक-दूसरे के मददगार

लादेन ने पिछले साल अक्‍टूबर में 24 घंटे में दो टेप जारी कर पाकिस्‍तान के बाढ़पीडि़तों के लिए मदद मांगी थी। उसने मुस्लिम राष्ट्रों को कोसते हुए कहा था कि उन्‍होंने बाढ़ पीड़ित पाकिस्तान में राहत सहायता के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।

उधर, लादेन को अमेरिकी सेना की कड़ी सुरक्षा के बावजूद अफगानिस्‍तान से भगाने में मदद करने वालों में पाकिस्‍तानी आतंकवादी भी थे। पाकिस्‍तान के आतंकी कमांडर मौलाना नूर मोहम्मद ने उसकी मदद की थी।

आपकी राय

पाकिस्‍तान की असलियत सामने आने के बाद अब अमेरिका को क्‍या करना चाहिए? लादेन की मौत के बाद क्‍या अमेरिका की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई खत्‍म मानी जानी चाहिए? या फिर यह लड़ाई आतंकवादियों के मददगारों को खत्‍म करने तक जारी रखनी चाहिए?