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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Friday, August 13, 2010

ताजमहल या तेजो महालय शिव मंदिर ?

बी.बी.सी. कहता है...........
ताजमहल...........
एक छुपा हुआ सत्य..........
कभी मत कहो कि.........
यह एक मकबरा है..........

ताजमहल का आकाशीय दृश्य......


आतंरिक पानी का कुंवा............


ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य


गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....




शिखर के ठीक पास का दृश्य.........



आँगन में शिखर के छायाचित्र कि बनावट.....

प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल



ताज के पिछले हिस्से का दृश्य और बाइस कमरों का समूह........



पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजों का दृश्य........


विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा.....


मकबरे के पास संगीतालय........एक विरोधाभास.........




ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा.........



निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह.........



दीवारों पर बने हुए फूल......जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ ) ....


निचले तल पर जाने के लिए सीढियां........



कमरों के मध्य 300फीट लंबा गलियारा
निचले तल के२२गुप्त कमरों मे सेएककमरा...


अन्य बंद कमरों में से एक आतंरिक दृश्य


एक बंद कमरे की वैदिक शैली में
निर्मित छत......




ईंटों से बंद किया गया विशाल रोशनदान .....



दरवाजों में लगी गुप्त दीवार,जिससे अन्य कमरों का सम्पर्क था.....


बहुत से साक्ष्यों को छुपाने के लिए,गुप्त ईंटों से बंद किया गया दरवाजा......




बुरहानपुर मध्य प्रदेश मे स्थित महल जहाँ मुमताज-उल-ज़मानी कि मृत्यु हुई थी.......




बादशाह नामा के अनुसार,, इस स्थान पर मुमताज को दफनाया गया.........



अब कृपया इसे पढ़ें .........

प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........

"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था"

प्रो.ओक. अपनी पुस्तक "TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस
बात में विश्वास रखते हैं कि,--
सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था.....
ओक कहते हैं कि......

ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था.
अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था,,
=>शाहजहाँ के दरबारी लेखक "मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी "ने अपने "बादशाहनामा" में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके ०६ माह बाद,तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए,आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे.
इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा
जयसिंह को दिए गए थे.......
=>यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिए, छीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था ,
उदाहरनार्थ हुमायूँ, अकबर, एतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं ....
=>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है---------
="महल" शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में
भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता...
यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है---------

पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था,,,बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ...
और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए,,,यह समझ से परे है.
प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि----
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी,चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है.....

इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं......
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था-----

==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है...
==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था......
==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया,,परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया,जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था......
==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा,के लिखित विवरण से पता चलता है कि,औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था.......
प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि,ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है.......


















15 comments:

  1. xxx यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है---------
    पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था,,,बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ...
    और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए,,,यह समझ से परे है.xxx


    शाहजहां का असल नाम ताजुद्दीन (tajuddin) था, जैसे अकबर का असल नाम जलालुद्दीन था, दो में दो जोडो चार
    मुमताज उल जमानी का खिताब 'मुमताज महल' से महल लो
    ताजुद्दीन के नाम से 'ताज' लो बन जायेगा 'ताजमहल'



    parveen shah:> उद्धृत करता हूँ:-
    "On July 14 2000 the Supreme Court in New Delhi dismissed a petition that sought to force a declaration that a Hindu king built Taj Mahal, as P.N. Oak has claimed. The court reprimanded the petitioner saying he had a "bee in his bonnet" about the Taj.
    In 2005 a similar petition was dismissed by the Allahabad High Court. This case was brought by Amar Nath Mishra, a social worker and preacher who says that the Taj Mahal was built by the Hindu King Parmar Dev in 1196."

    "bee in his bonnet" ??? आपको नहीं लगता कि माननीय न्यायालय ने श्री पी० एन० ओक साहब को Reprimand करते हुऐ कुछ ज्यादा ही सख्त शब्दों का प्रयोग किया था... या शायद वह इन्ही शब्दों को deserve करते थे ?

    अब सेकुलर कहो या वामपंथी, क्या करूं मित्र, भारत का नागरिक हूँ अत: मैं तो माननीय न्यायालय के निर्णय को ही मानूंगा!

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    1. tum na secular ho na vaampanthi ho. Tum hinduo ke naam pe kalank ho,jise apne dharm pe abhimaan nahi hai

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    2. to tum kya ho tum ek madharchod ho lagta hai tumhari maa bahut sare landon se chudi hai isiliye aisa bol rahe ho jo Hundu dharm ka apman kar rahe ho. Ek hindu hona hi apne aap me abhiman ki baat hai.........

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    3. tum na madharchod ho............

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  2. Maan Gaye dada.. Pahali Baar Aankh Khuli Ab RESEARCH suru karunga..
    Likthe rahiye..

    Vande Matram.

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  3. bahut bahut shukriya is jaankari ko share karne ke liye......

    Meri Nayi Kavita aapke Comments ka intzar Kar Rahi hai.....

    A Silent Silence : Ye Kya Takdir Hai...

    Banned Area News : Andhra Pradesh News

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  4. aap apne vebsaait me se bal thakare ka naam nikal de, hinduo ko ladane vale mujhe pasand nahi, ye desh nahi ghumte hai, andar baithe, baithe satta tak pahuchane ka prayas karte hai. bahut karib se dekhahai in satta ke lobhiyo ko....

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  5. ठीक है मित्र यही बात उस दिन भी कहना जब माननीय न्यायालय ताजमहल को हिंदु राजभवन मान लेगी क्योंकि ये समय बहुत शीघ्र ही आने वाला है..मैं भी यही चाहता हूँ कि सभी बामपंथी न्यायालय को माने क्योंकि ये न्यायालय का तब तक ही सम्मान करती है जब तक वो इसके पक्ष में रहती है जैसे ही इसके विपक्ष होती है तत्क्षण न्यायालय पर दोष लगाना शुरु कर देती है..जैसा कि अभी अयोध्या मामले में हुआ..
    मेरे दिल में न्यायाधीष से ज्यादा पी.एन.ओक के लिए सम्मान है क्योंकि वो एक राष्ट्र-भक्त और स्वतंत्रता-सेनानी थे..आजाद-हिंद फ़ौज से भी जुड़े हुए थे...उन्होंने जितने कष्ट उठाए हैं उतने न्यायाधीश जी ने नहीं..और वो एक प्रकाण्ड विद्वान भी थे..जब उन्होंने विश्व को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी तो किसी की हिम्मत नहीं हुई उनसे बहस करने की क्योंकि पूरा विश्व जान रहा है कि उनका इतिहास किसी प्रमाण पर आधारित ना होकर उस सुनी-सुनाई बातों पर आधारित है जो शासकों द्वारा अपनी वाहवाही के लिए हल्ला किया गया था..

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  6. waise baat kuch hazam nhi hui agar aisa hai to abhi tak kuch kiya kyun nhin kiya gya

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  7. topic to sochne layak h, lekin itni baat se hi kaam nahi chalega, hame kuch aur proof dhundne honge ise hindu sampatti siddha karne ke liye, kyonki aaj sabhi ko ye bataya jata h ki tajmahal shahjahan ne banwaya h.

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  8. ab tak uplabhd saboot koi kori kalpna nahi hai ...ye sare saboot vahi hai jo dikh rahe hai ,,,mai khud 10mp ke camera se gummat [e lge kalsh ko dekh kar chouk gya tha...

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  9. meri ek bat samnjh nahi aati ke kuchh log be wajh be matlab kisi bhi bat ko bina samjhe kuch bhi be matlab comment kar dete hai haqeeqat jo hai wo hi rahe gi history ko bato se nahi badla ja sakta

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  10. tajmahal ek makbara hai kuchh nasmanjh log be matlab gumrah karrane ke liye galat salat bate banate hai hame sab bato ko bhool kar haqeeqat par najar dalni chahiye.na hi history badal sakti aur na hi sachchai chhup sakti.hum adharmik bato par dhayan nahi dete.

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  11. pura tatv vibhag ye 22 kamare Q nahi kholta??????????????????????????

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