ॐ धर्मो: रक्षति रक्षितः,जय हिंद जय हिंदुत्व --जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी-- वो हिन्दू हो या मुसलमान,जिसको इस देश से प्यार नहीं है.उसको इस देश में,रहने का अधिकार नहीं है.-- अगर भारत भूमि में रहना होगा.वन्देमातरम कहना होगा.-- राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है.

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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Tuesday, June 8, 2010

भारत भूमि


यह पुण्यभूमि भारत भूमि
सारी दुनिया से न्यारी है
जहाँ पुरुष सब धर्म रूप हैं
देवी हर एक नारी है
यही जनम लेकर गौतम ने
प्रेम पंथ सिखलाया था
सत्य,अहिंसा,पर सेवा का
सबको पथ पढाया था
यहीं से जन्मा आदि धर्म जो
हिन्दू धर्म है कहलाया
जीव मात्र से प्रेम करो तुम
जिसने सबको सिखलाया
जैन धर्म और सिक्ख धर्म की
जन्मभूमि यह धर्म भूमि है
नानक जैसे शत संतों की
भारत भूमि यह कर्म भूमि है
यही थे जन्मे वीर शिवाजी
जिसने सबको दिखा दिया था
हम लोगों में कितनी शक्ति
मुगलों को तो रुला दिया था
गाँधी,सुभाष,टैगोर,तिलक
सब इस भूमि के बेटे थे
इसकी छाती पर खेले थे,
इसकी छाती पर लेते थे
फिर हमने भी तो जन्म लिया है
ऐसी पावन धरती पर
तो ऐसा काम करें मिलकर
जिससे रोशन हो दुनिया भर.
-राहुल पंडित

3 comments:

  1. bahut sundar..

    vande bharat matram

    गाँधी जी का तीन बन्दर का सिद्धांत-एक नकारात्मक सिद्धांत http://iisanuii.blogspot.com/2010/06/blog-post_08.html
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