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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Wednesday, June 16, 2010

इस्लाम व कुरान पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिए गए क्रातिकारी विचार


स्वामी विवेकानन्द
ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।

कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३
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गुरु नानक देव जी
मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था ।

नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८०

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महर्षि दयानन्द सरस्वती
इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१

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महर्षि अरविन्द
हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६

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सरदार वल्लभ भाई पटेल
मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार ।

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बाबा साहब भीम राव अंबेडकर
हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१

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माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी
पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें ।
बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७

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गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर
ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । ; - रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर

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मोहनदास करम चन्द्र गांधी
मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है ।
गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग

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लाला लाजपत राय
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें ।

पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५

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समर्थ गुरू राम दास जी
छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे , उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया ।

- डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८

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राजा राममोहन राय
मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।

वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७

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श्रीमति ऐनी बेसेन्ट
मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा ।

- कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५

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स्वामी रामतीर्थ
अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है ।

29 comments:

  1. इतनी उत्कृष्ट जानकारी एकत्र करने के लिये साधुवाद। आंखें खोलने के लिये पर्याप्त हैं।

    पर दुख की बात है कि जहाँ पर मुसलमानों के जिहाद की सच्चाई को पश्चिम के लोग दसवीं शदी में ही समझ गये और उसकी काट 'क्रूसेड' के रूप में ले आये ; भारत के लोग कोई कारगर हल नहीं निकाल पाये और रामभरोसे रह गये। बहुत से हिन्दू अब भी इस्लाम को 'धर्म' समझते हैं और कुरान को 'धर्मग्रन्थ' ।

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  2. सच का आइना दिखाने वाला कोई तो आया
    Islam = Sex+Terrorism

    -इस्लाम अय्याशी (चार निकाह, जन्नत में 72 हूरें) और आतंक (जिहाद) का पाठ पढाता है

    -ये लोग अपनी बहनो को भी नहीं छोडते, उनसे निकाह करके बिस्तर में ले जाते हैं

    -कोई मुसलमान हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर दे तो उसे मजहब से निकाल देते हैं

    -हिन्दू धर्म ग्रथों को जलाना, मन्दिरों को तोडना, देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाना, उनके बारे में अपशब्द बोलना इनकी घृणित मानसिकता का प्रमाण है

    - हिन्दुओं को मिटाने या मुसलमान बनाने पर इनको जन्नत रूपी अय्याशी का अड्डा मिलता है

    -मुसलमान (ना)मर्दों को बुरका बहुत भाता है, क्योंकी बुरके में छिपकर ये "बहुत कुछ" करते हैं

    - मुसलमान फर्जी नामों का बुरका पहनकर भौंकते फिरते रहते हैं
    -कुल मिलाकर इस्लाम (ना)मर्दों का मजहब है

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  3. स्नेह और सहिष्णुता के प्रचारक स्वामी विवेकानन्द कहते हैं ‘‘पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम संसार मे समानता के संदेशवाहक थे। वे मानवजाति में स्नेह और सहिष्णुता के प्रचारक थे। उनके धर्म में जाति-बिरादरी, समूह, नस्ल आदि का कोई स्थान नहीं है।’’
    स्वामी विवेकानन्द इस्लाम के बड़े प्रशंसक और इसके भाईचारा के सिद्धांत से अभिभूत थे। वेदान्ती मस्तिष्क और इस्लामी शरीर को वह भारत की मुक्ति का मार्ग मानते थे। अल्मोड़ा से दिनांक 10 जून 1898 को अपने एक मित्र नैनीताल के मुहम्मद सरफ़राज़ हुसैन को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा कि
    ‘‘अपने अनुभव से हमने यह जाना है कि व्यावहारिक दैनिक जीवन के स्तर पर यदि किसी धर्म के अनुयायियों ने समानता के सिद्धांत को प्रशंसनीय मात्र में अपनाया है तो वह केवल इस्लाम है। इस्लाम समस्त मनुष्य जाति को एक समान देखता और बर्ताव करता है। यही अद्वैत है। इसलिए हमारा यह विश्वास है कि व्यावहारिक इस्लाम की सहायता के बिना, अद्वैत का सिद्धांत चाहे वह कितना ही उत्तम और चमत्कारी हो विशाल मानव-समाज के लए बिल्कुल अर्थहीन है।’’विवेकानन्द साहित्य, जिल्द 5, पेज 415
    स्वामी जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि
    ‘‘भारत में इस्लाम की ओर धर्म परिवर्तन तलवार (बल प्रयोग) या धोखाधड़ी या भौतिक साधन देकर नहीं हुआ था।’’विवेकानन्द साहित्य, जिल्द 8, पेज 330

    और अधिक जानकारी के लिये पढें

    इस्लाम और कुरआन पर महापुरूषों के विचार
    http://islaminhindi.blogspot.com/2009/12/islam-quran-comments-non-muslims.html

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  4. इन्ही में से कई महापुरषों ने इस्लाम की तारीफ में भी बहुत कुछ कहा है तो क्या ये पुरुष जिन्हें महापुरुष कहा जाता है confuse थे या अवसरवादी ? जो तेरे मुंह पर तेरी और मेरे पर मुंह पर मेरी वाली निति अपनाते थे शायद इनकी ये निति देश के विभाजन का एक बड़ा कारन रही हो ?

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  5. प्रसंशनीय प्रस्तुति।

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  6. सत्यपथखोजी,

    नहिं न तो वे महापुरष उलझन में थे,और न वे अवसरवादी।
    यह अन्तर हमारी जलदबाजी का ही परिणाम है। हम जल्दी ही निर्णय पर पहुंच जाते है।
    वे किसी अच्छी बातो को लेकर प्रशंसा करते थे तो गलत धारणाओ की आलोचना।

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  7. @ सुज्ञ,

    आपकी बात से सहमत परन्तु पूरी तरह नहीं, जल्दबाजी में हर पुरुष को भी महापुरुष का तमगा दे दिया जाता है और देने वाले भी मनुष्य है,

    वैसे इस बहाने आपके ब्लॉग पर जाने का अवसर भी मिला अच्छा ब्लॉग है

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  8. जबरदस्त जानकारी

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  9. सादर वन्दे !
    बहुत ही सुन्दर व ज्ञानवर्धक पोस्ट |
    रत्नेश

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  10. अति उत्तम!!!!!!!!!!
    मुसलमानों का नाश मुसलमानों के हाथों ही हो रहा है. पाकिस्तान का उदाहरण सबके सामने है. मुस्लमान ही मुसलमानों की मस्जिदों पर बम फोड़ रहे हैं. इसी तरह इस्लाम की हिंसा की शिक्षा ही इस्लाम का समूल नाश कर देगी.

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  11. {महमूद एंड कम्पनी ,मरोल पाइप लाइन ,मुंबई द्वारा हिंदी में प्रकाशित कुरान मजीद से ऊदत } इस्लाम के अनुसार इस्लाम के प्रति इमान न रखने वाले ,व बुतपरस्त( देवी -देवताओ व गुरुओ को मानने वाले काफिर है ) 1................मुसलमानों को अल्लाह का आदेश है की काफिरों के सर काट कर उड़ा दो ,और उनके पोर -पोर मारकर तोड़ दो (कुरान मजीद ,पेज २८१ ,पारा ९ ,सूरा ८ की १२ वी आयत )! 2.....................जब इज्जत यानि , युद्द विराम के महीने निकल जाये ,जो की चार होते है [जिकागा ,जिल्हिज्या ,मोहरम ,और रजक] शेष रामजान समेत आठ महीने काफिरों से लड़ने के उन्हें समाप्त करने के है !(पेज २९५ ,पारा १० ,सूरा ९ की ५ वी आयत ) 3...................जब तुम काफिरों से भिड जाओ तो उनकी गर्दन काट दो ,और जब तुम उन्हें खूब कतल कर चुको तो जो उनमे से बच जाये उन्हें मजबूती से केद कर लो (पेज ८१७ ,पारा २६ ,सूरा ४७ की चोथी आयत ) 4............निश्चित रूप से काफिर मुसलमानों के खुले दुश्मन है (इस्लाम में भाई चारा केवल इस्लाम को माननेवालों के लिए है ) (पेज १४७ पारा ५ सूरा ४ की १०१वि आयत ) .........................क्या यही है अमन का सन्देश देने वाले देने वाले इस्लाम की तस्वीर इसी से प्रेरित होकर ७१२ में मोह्हम्मद बिन कासिम ,१३९८ में तेमूर लंग ने १७३९ में नादिर शाह ने १-१ दिन मै लाखो हिन्दुओ का कत्ल किया ,महमूद गजनवी ने १०००-१०२७ में हिन्दुस्तान मै किये अपने १७ आक्रमणों मै लाखो हिन्दुओ को मोट के घाट उतारा मंदिरों को तोड़ा,व साढ़े ४ लाख सुंदर हिन्दू लड़कियों ओरतो को अफगानिस्तान में गजनी के बाजार मै बेच दिया !गोरी ,गुलाम ,खिलजी ,तुगलक ,लोधी व मुग़ल वंश इसी प्रकार हिन्दुओ को काटते रहे और हिन्दू नारियो की छीना- झपटी करते रहे {द हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया एस टोल्ड बाय इट्स ओवन हिस्तोरिअन्स,लेखक अच् ,अच् एलियार्ड ,जान डावसन }यही स्थिति वर्तमान मै भी है सोमालिया ,सूडान,सर्बिया ,कजाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,अल्जीरिया ,सर्बिया ,चेचनिया ,फिलिपींस ,लीबिया ,व अन्य अरब देश आतंकवाद के वर्तमान अड्डे है जिनका सरदार पाकिस्तान है क्या यह विचारणीय प्रश्न नहीं की किस प्रेरणा से इतिहास से वर्तमान तक इक मजहब आतंक का पर्याय बना है ???????????????

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  12. कुरआन-शरीफ की आयत के शाब्दिक अनुवाद को ध्यान में रख कर उसका अर्थ निकालना सामान्य व्यक्ति के बस की बात नही है.कुरआन शरीफ की आयातों का अर्थघटन सीखने के लिए ६ से ७ विषय पर विशेषज्ञता प्राप्त करनी पड़ती है जिसमे व्याकरण, शाने-नुज़ूल(कोनसी आयत कब उतरी), किसके लिए उतरी, हदीस, तफसीर और फिकह वगेरह.क्यूंकि कुरआन अल्लाह का कलाम (देव-वाणी) है कोई इंसान की वाणी नही है.(अगर कुरआन अल्लाह का कलाम न होता तो न जाने उसमे अभी तक कितना बदल गया होता, १४०० वर्ष से अभी तक एक शब्द नही बदला है! और ये चेलेंज आज भी मोजूद है. यूँ तो कुरआन में बहुत सारे चेलेंज हैं लेकिन एक उन में से ख़ास है की लाखों मुसलमानों को सम्पूर्ण कुरआन मौखिक याद है. शायद ही कोई हिन्दू धर्म-गुरु होगा कि जिसको सम्पूर्ण गीता मौखिक याद हो!!!!!!)
    लकीर के फकीरों के लिए कुरान में साफ़ बयान है की ईमान वालों के लिए कुरआन मार्गदर्शक है और विरोधियों के लिए रास्ता भटकाने वाला.मार्गदर्शक उन के लिए है जो लोग कुरआन के शाब्दिक अनुवाद का अर्थघटन व्याकरण, शाने-नुज़ूल(कोनसी आयत कब उतरी), किसके लिए उतरी, हदीस, तफसीर और फिकह वगेरह को ध्यान में रख कर करते हैं,रास्ता भटकाने वाला उन के लिए जो सिर्फ और सिर्फ शाब्दिक अनुवाद को ध्यान में रखकर उसका अर्थघटन करते हें.
    कुरआनकी क़त्ल वाली आयतें का शाब्दिक अनुवाद पढ़-पढ़ाकर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश आज से नही बहुत पहले से होती रही है.

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  13. मैं खुद आंतकवाद के खिलाफ हूँ लेकिन,इस्लाम को बदनाम करना ना इन्साफी अभी तक तुमने इस्लाम को पढ़ा ही नहीं है.इस्लाम का अर्थ ही शान्ति या अमन होता है.इस्लाम कभी आंतकवाद नहीं सिखाता.

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  14. तुम्हारी माँ की ॑*ऽ‌॑॑,साले हरामी,कुत्ते,बहनच॑*॒,,मादर॑*॑*
    शाब्दिक अर्थ पर मत जाइयेगा..इसका अर्थ समझ गए तो ये आपको जन्नत तक पहुँचा देगा अगर साधारण अर्थ लिए तो गुस्सा आएगा और लड़ाई-झगड़ा शुरु हो जाएगा..इसके अर्थ समझने के लिए तो हिंदी,उर्दू के व्याकरण,समाज-शास्त्र,काम-शास्त्र,कोकशास्त्र आदि पढ़ने होंगे..
    **ऐसा ग्रंथ किस काम का जो इतने लोगों को दिग्भ्रमित करवाकर करोड़ों लोगों की हिंसा करवा दे...????
    **गीता को पूरा याद करने की जरुरत भी नहीं है अगर उसके एक बात का भी पालन कर लिया तो सारा जीवन धन्य हो जाएगा..उसका सार मैं बता देता हूँ-"निष्काम कर्म करो".अर्थात बिना किसी स्वार्थ के अपना कर्त्तव्य करते चलो.कर्त्तव्य परोपकार के लिए प्रेरित करती है ना कि किसी को दुःख देने के लिए..
    **विवेकानन्द बहुत ही महान थे..उन्होंने जो त्याग किए हैं मानवता के लिए उसके लिए मैं भूल से भी कभी शंका नहीं कर सकता उनपर...हिंदू धर्म जाति-प्रथा तक ही सीमित नहीं है और ना ही इतना छोटा कि इसकी किसी बुराईयों को दूर करने के लिए किसी और का सहारा लेना पड़े..हिंदू धर्म जाति-प्रथा को दूर करने के लिए समर्थ है.देख लो कितनी हद तक सफ़ल हो चुके हैं हमलोग इसे दूर करने में..हो सकता है विवेकानन्द जी ने मुसलमान के जाति-व्यवस्था का बड़ाई कर दिया होगा जिसे तुमलोगों ने बढ़ा-चढ़ाकर लोगों के सामने रख दिया नहीं तो उनके जैसा विद्वान ऐसी बात कहे ये मुझे विश्वास नहीं..
    **और जरा बताओ तो तुमलोगों में जाति-प्रथा नहीं है...????क्यों झूठ-मूठ के समानता का ढोल पीटते रहते हो....!!तुमलोगों में भी शादी अपनी जाति से ही होती है...एक पठान मुसलमान अंसारी से शादी करेगा क्या....????
    **और नाज तुमने तो खूब समझा है ना कुरान को....अच्छा छोड़ो ये सब प्रश्न बाद में पहले मुझे ये जानना है कि करोड़ों मुसलमानों में से कोई तो होगा जिसने कुरान को अच्छी तरह समझा होगा तो कम-से-कम दस मुसलमानों के भी नाम बता दो जिसने देश की आजादी में योगदान दिया हो..कोई ऐसे व्यक्ति का नाम बताओ जिसने अपना सर्वस्व सुख त्यागकर अपना जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया हो और उसके लिए दुःख उठाया हो...मेरा पहले ये चुनौती स्वीकार लो फ़िर आगे बात करेंगे...

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  15. तुम्हारी माँ की ॑*ऽ‌॑॑,साले हरामी,कुत्ते,बहनच॑*॒,,मादर॑*॑*
    शाब्दिक अर्थ पर मत जाइयेगा..इसका अर्थ समझ गए तो ये आपको जन्नत तक पहुँचा देगा अगर साधारण अर्थ लिए तो गुस्सा आएगा और लड़ाई-झगड़ा शुरु हो जाएगा..इसके अर्थ समझने के लिए तो हिंदी,उर्दू के व्याकरण,समाज-शास्त्र,काम-शास्त्र,कोकशास्त्र आदि पढ़ने होंगे..
    **ऐसा ग्रंथ किस काम का जो इतने लोगों को दिग्भ्रमित करवाकर करोड़ों लोगों की हिंसा करवा दे...????
    **गीता को पूरा याद करने की जरुरत भी नहीं है अगर उसके एक बात का भी पालन कर लिया तो सारा जीवन धन्य हो जाएगा..उसका सार मैं बता देता हूँ-"निष्काम कर्म करो".अर्थात बिना किसी स्वार्थ के अपना कर्त्तव्य करते चलो.कर्त्तव्य परोपकार के लिए प्रेरित करती है ना कि किसी को दुःख देने के लिए..
    **विवेकानन्द बहुत ही महान थे..उन्होंने जो त्याग किए हैं मानवता के लिए उसके लिए मैं भूल से भी कभी शंका नहीं कर सकता उनपर...हिंदू धर्म जाति-प्रथा तक ही सीमित नहीं है और ना ही इतना छोटा कि इसकी किसी बुराईयों को दूर करने के लिए किसी और का सहारा लेना पड़े..हिंदू धर्म जाति-प्रथा को दूर करने के लिए समर्थ है.देख लो कितनी हद तक सफ़ल हो चुके हैं हमलोग इसे दूर करने में..हो सकता है विवेकानन्द जी ने मुसलमान के जाति-व्यवस्था का बड़ाई कर दिया होगा जिसे तुमलोगों ने बढ़ा-चढ़ाकर लोगों के सामने रख दिया नहीं तो उनके जैसा विद्वान ऐसी बात कहे ये मुझे विश्वास नहीं..
    **और जरा बताओ तो तुमलोगों में जाति-प्रथा नहीं है...????क्यों झूठ-मूठ के समानता का ढोल पीटते रहते हो....!!तुमलोगों में भी शादी अपनी जाति से ही होती है...एक पठान मुसलमान अंसारी से शादी करेगा क्या....????
    **और नाज तुमने तो खूब समझा है ना कुरान को....अच्छा छोड़ो ये सब प्रश्न बाद में पहले मुझे ये जानना है कि करोड़ों मुसलमानों में से कोई तो होगा जिसने कुरान को अच्छी तरह समझा होगा तो कम-से-कम दस मुसलमानों के भी नाम बता दो जिसने देश की आजादी में योगदान दिया हो..कोई ऐसे व्यक्ति का नाम बताओ जिसने अपना सर्वस्व सुख त्यागकर अपना जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया हो और उसके लिए दुःख उठाया हो...मेरा पहले ये चुनौती स्वीकार लो फ़िर आगे बात करेंगे...

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  16. Thank you ,

    Giving valuble information ,

    Hidustan Bachavo ain kaliyug ke devin ( asur ) se ,

    Jay Hind.

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  17. tum logo li coments se pata chal raha hai ki tum kitne sabby bhartiy log ho,,, aisehi jahar ugalte raho ye jahar ham musalmano ko amrit ki tahah kam karega tum jitna burai likhoge ham musalman ka iman utna majbut hoga bhot bhot sukriya

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  18. ham musalman karib 50 se jada desh me hai agar ham 2karod mar bhi jayenge to kya farak padega tumhari kitni aabadi hai hindustan ko chhod kar btawo kawon sa hai hindu desh dusra

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    1. tum main se jayada muslmaan ya to kayar ya garib hindu , sikh, bodh ,aur doosre dharm vaale hain jo dar kar muslim bane.......agar tum b hakkikat ray, guru arjun dev, guru teg bahadur aur gurugovind singh and many more ki tarah kurbanaiyan dete to shayad aaj ye sansaar itne khatre main nahin hota

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  19. aur rahi baat khun bahane ki to aap sabhi muslim birodhi ko btadu ki mahabharat ke udddh me bhot log mare gaye the aur tum logo ke muh par tamacha hai wo dasta jab aap nabiye paak ko makka chhodna pada aur jab wo madina chale gaye to bhi makka wale kafir unse janng kiye aur un kafiro ko muh ki khani pati aur wo sare kafir unke samne hare huwe bebas sach rahe the ki ab to ham mare jayenge q ki nabiye pak ko wo log bhot sataye the us wakt agar nabiye pak chahte to unsabi ka katal kar dete mge unhone sabhi logo ko maf kar diya ye hai islam ka asali chehra

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    1. kaun hai nabiya pak.......chal accha hai tu mahabharat to janta hai......mahabharath apne aap main ek learning book hai jismen har tarah k behaviour, relation aur friendship ka varnan bahut hi acchi tarah kiya hai.........akela nabiya pak kaise itne saare logon ko mar deta?

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  20. aur ek baat btana chahunga ki tumhari nichali biradri bahot teji se isaiyo ke lalach ke changul me hai aur andar hi andar timhari hindubiradri ke nichle biradri kanwart ho rhe hai mai jaha rah raha hu waki sare dom chamar kahane ko to hindu hai mgar unke ghar me jake chak jhak ke dekho ki diwaro par cros aur isa ka postar laga huwa hai mai mugal sarai me rahata hu yaha 200sal purana charch hai aur isi charch me mai itne hindu ko dekhta hu ki mera dimag hi hil jata hai isai se jada hindu niche biradri ke aur jaye bhi q na q ki hindu biradri me bhot bhed bhaw hai ekta nam ki koi chij nahi hai aur bade bade jat jat wale in chote jati walo par itna julm jo karate hai unhe juti ka dhul jo samajhatehai pahale aapne ujadte huwe chamn ko bchawo fir kisi ke daman ko niharna

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    1. hamari nichli biradariya hamari shaan hain............haan hoti hain kuch kamiyan sab jagah lekin ab vo sudhari ja rahi hain........aur vahi log ab aage badh rahe hain

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  21. tumhare dharam khud aslilta bhara huwa hai aur tumhare bhagwan bhi to 3 ,3 sadiya kiye the q nahi rok liye unko ki nahi bhagwan wo pap hai krisn ek no ka lofar ye sara hindustan janta hai nangi nati ladakiyo ko ped par chahad ke niharte the mai musalman hu aur jo sachhai hai wahi kahunga aur abhadra sabd bhi tum logo ki tarah nahi likhunga q ki ye hamare sariyat ke khilaf hi 2 sankar ji ka wakya hai unka ning kaise kat gaya aiyasi to tuhare mahapurush karte the hamare nahi aur jada din tak jhuth ka jhada nahi rah sakta tuhara bhi jhada fut jayega ahankariyo

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    1. beta jise tum khuda bolte ho vo hi shankar, krishn, brahma, ram, vishnu hain pehle ling vali kahani dang se padh tab boliyo......tujhe main abahadra shabd nahi bolunga kyunki tu poora hi abhadra h.....pehle dhang se puran, gita, ved aadi padh le tab tu b hindu sanskriti k vashibbhoot aur abahdra se bhadra ho jayega

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  22. oye irshad pehle to ye jaan le tere bhi poorvaj hindu the..........nahi pata ho to apne bade buddhon se poochio jinhone muslim aakrantaon k dar se ye dharam svikar kiya. duniya main jo b muslim hai vo darr se muslim bana hai na ki sacchai se..........1500 saal pehle muhmmad k pehle kaun tha jara bata.......hinduon ka ithihas laakho saal purana hai.....vaise b hamare granthon meai likha hua hai kalyug main adharm bhut teji se failega aur dharmon main to ye thoda bahut hai lekin tumhare yahan bahut jyada hai........haan kuch abul kalam, ashfaq ulla khan, tipu sultan jaise muslim the jinhone is desh ko apna sammjha....par tum jaise logon ki vajah se poora islam badnaam hai....

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  23. pehle dang se padh, aur haan haamre yahan choti choti bacchiyon k saath shaadi aur sex nahi karte.......

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  24. majboot to tum kahin b nahin ho jitna doosron ko maar rahe ho usse jayada khud ko khatam kar rahe ho....

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