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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Friday, June 4, 2010

३ गलतियाँ:जीवन बदल देती हैं.


हम अपनी जिन्दगी में जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियाँ कर देते हैं जो हमारे पूरे जीवन क्रम को प्रभावित करती हैं.मै भी अपनी जिन्दगी की ३ बड़ी गलतियाँ आज सबके सामने शेयर करने जा रहा हूँ शायद वो गलतियाँ नहीं हुई होती तो मै आज कुछ और ही होता-
१-पढने में मुझे रूचि है,लेकिन मै कभी तकनीकी क्षेत्र में नहीं जाना चाहता था.घर वाले इंजिनियर बनाना चाहते थे लेकिन मुझे इतिहास और हिंदी से प्रेम था.घर वालों ने ध्यान नहीं दिया और मै कह नहीं पाया,नतीजा मै आज अपना काम कर्तव्य की तरह ही कर पाता हूँ,मुझे बहुत मजा नहीं आता.अगर मै अपने मन की कर पाता तो आज शायद कुछ और होता.
२.एक लड़की शायद जो मुझे बहुत चाहती थी,उसको मै पहचान नहीं पाया.मै हमेशा लोगों से अलग बनने की कोशिश करता रहा.मै कमोवेश एक ऐसी लड़की से आकर्षित हुआ जिसके बारे मे मै सबकुछ जनता था.ये जानते हुए की उसका.......ठीक नहीं है मै उसके सुधरने का इंतजार करते हुए ३ साल बिता दिए.लेकिन जब मुझे अचानक पता चला की जैसे सूरज से बर्फ की बारिश नहीं हो सकती उसी तरह वो नहीं बदल सकती,३ साल से वो वैसी की वैसी है तो दिल को धक्का सा लगा.मै अपने आप को कोशता रहा.मै समझ नहीं पा रहा हूँ की मै क्या करूँ?
३.मै स्वामी विवेकानंद जी से अपने जीवन में सबसे अधिक प्रभावित हूँ.पता नहीं मै मुझे ऐसा क्यूँ लगता है की मै देश-दुनिया में फसने के लिए नहीं बना हूँ.कभी-कभी मुझे इस दुनिया से विरक्ति होने लगती है तो कभी-कभी कर्तव्य बोध होता है और पूज्य माताजी और पिताजी के बारे में सोच कर रूक जाता हूँ.मै एक बार अचानक अपने ऑफिस से हिमालय के लिए निकल गया.मै पंद्रह दिन तक घूमता रहा.फिर अचानक पूज्य माताजी के एक फ़ोन ने मुझे वापस आने पर मजबूर कर दिया.शायद मै वापस नहीं आता तो आज मै कसमकस में खुद को परेशान नहीं कर रहा होता.

8 comments:

  1. आईये जानें .... मैं कौन हूं!

    आचार्य जी

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  2. कोई भी अपनी गल्तियाँ महसूस करने के बाद भी आसानी से क़ुबूल नहीं करता ...ये अपने आप में बड़ी बात है मगर दूरदर्शिता रखते हुए अंजाम हमेशा नजर में रखना चाहिए । आप हिमालय चले गए , तो क्या आपका पिछला जीवन आपके साथ साथ नहीं चला ? कभी भी आप अपने वर्तमान जीवन से भाग कर शांति नहीं पा सकेंगे ...अपने कर्तव्यों को पूरा करने में ख़ुशी महसूस करना ही जीवन जीने की कला सिखाता है । बहुत छोटे हैं आप , सत्य हमेशा हरा भरा होता है , ये सच है , शुभकामनाओं के साथ ...

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  3. चलिए ग़लतियों से सबक लेकर सुधार ही तो हमें फिर से ग़ल तियों के क़रीब ले जाने से बचाता है।

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  4. अपने अतीत अफसोस कभी नहीं. आगे देखो
    vivj2000.blogspot.com

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  5. राहुल जी इन्सान जो भी कर ले वो प्रभु के बताए रास्ते पर चलने के सिवा कुछ नहीं कर सकता । बैसे आपको अपनी मानमसिकता बदलकर अपना काम शौक से करना दाहिएष
    हम जिन्दगी में ड्राईवर बनना चाहते थे लेकिन आता-पिता ने ने मना कर दिया उनकी जिद थी हमें पढ़ाने की फिर हमारी जिन्दगी में सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद था सेना में भरती होना वो आंखों में समस्या के कारण पूरा नहीं हो सका लेकिन हम अपना ये शौक आज भी पूरा कर रहे हैं दूसरे तरीकों से सैनिक काम कर।
    मतलब हम जो भी करें मन से करें तो आन्नद तो आएगा ही।
    बैसे आपको यथाशीध्र स्वामी रामदेव जी के साथ चल कर अपनी मंजिल को पाने का प्रयत्न करना दाहिए।

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 06.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  7. आईये जानें .... मन क्या है!

    आचार्य जी

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