ॐ धर्मो: रक्षति रक्षितः,जय हिंद जय हिंदुत्व --जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी-- वो हिन्दू हो या मुसलमान,जिसको इस देश से प्यार नहीं है.उसको इस देश में,रहने का अधिकार नहीं है.-- अगर भारत भूमि में रहना होगा.वन्देमातरम कहना होगा.-- राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है.

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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Thursday, March 25, 2010


ह से हिन्दू,ह से हिंदी,ह से हिंदुस्तान है
ह से हरि हैं,ह से हर हैं,हरी-हर अपने प्राण हैं
ह से हर-हर महादेव की बोली हमने बोला है
ह से हरि का काज कारन को
हर हिन्दू मन डोला है
हम ही हिंदी,हम ही हिन्दू हम ही हिंदुस्तान हैं
दुनिया को समता सिखलाता,हिन्दू धर्म महान है
हरि-हर की कृपा से जो प्रण,हर हिन्दू ने ठाना है
हम हिन्दू,हिंदुत्व की ताकत,हमे लक्ष्य को पाना है
जन्मभूमि पर विशाल मंदिर,हर हिन्दू की चाहत है
विधार्मिओं के इस कुकृत्य से,हर हिन्दू मन आहत है
हरि-हर अपने पूज्य देवता,हिंदी अपनी शान है
हिंदुत्व जीने का जारिया,भारत राष्ट्र महान है
हर हिन्दू,हरि-हर का पूजक,हमे जान से प्यारा है
हुम तो हैं दुनिया के रक्षक,रक्षा संकल्प हमारा है
हर गली गली हर,हर डगर-डगर
हर गावं-गावं,हर शहर-शहर
केशरिया बाना पहन-पहन
बच्चा-बच्चा हर हिन्दू का
हरि-हर की बोली बोलेगा
विधार्मिओं की ताकत को वह
तलवारों से तोलेगा.
-राहुल पंडित

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