ॐ धर्मो: रक्षति रक्षितः,जय हिंद जय हिंदुत्व --जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी-- वो हिन्दू हो या मुसलमान,जिसको इस देश से प्यार नहीं है.उसको इस देश में,रहने का अधिकार नहीं है.-- अगर भारत भूमि में रहना होगा.वन्देमातरम कहना होगा.-- राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है.

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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Thursday, March 25, 2010

तितली रानी


रंग विरंगे पंखो वाली
पिली लाल हरी और काली
परी देश की राजकुमारी
तुम कितनी लगती हो प्यारी
उडती जब तुम असमान में
बच्चे होते ख़ुशी लान में
दौड़-दौड़ कर तेरे पीछे
कहते सभी मधुर सब्दों में
सबकी सुन्दरता है पानी
देखो आ गयी तितली रानी
जब तुम फूलों पर बैठती
कलियाँ मचल-मचल इठलाती
पौधे झूम-झूम कर गाते
हवा प्रेम संगीत सुनाती
कहती तितली रानी आओ
हम सब नाचे झूमे गाएं
दुनिया के इन सब लोगों को
प्रकृति का सन्देश सुनाएँ
छोड़ आपसी मार-काट को
प्रकृति में तुम घुल मिल जाओ
सबको प्रेम की राह दिखाकर
जीवन का असली सुख पाओ
-राहुल पंडित

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