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अगरहो प्यार के मौसम तो हमभी प्यार लिखेगें,खनकतीरेशमी पाजेबकी झंकारलिखेंगे

मगर जब खून से खेले मजहबीताकतें तब हम,पिलाकर लेखनीको खून हम अंगारलिखेगें

Tuesday, July 7, 2015

अराजकता,अलगाववाद और अरविन्द केजरीवाल

आखिर क्या है केजरीवाल और कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मालिक की दोस्ती का राज?

केजरीवाल की यासीन मलिक से दोस्ती लगभग वर्षों पुरानी है। केजरीवाल जब से नौकरी छोड़कर एनजीओ चला रहे हैं तभी से दोनों की दोस्ती जगविदित है।यासीन मालिक घाटी में केजरीवाल के एनजीओ का काम देखता था।(हलाकि तब उसकी पहचान एक अलगाववादी के रूप में नहीं थी) बाद में यासीन एक बड़ा अलगाववादी नेता बन गया और कश्मीर में रेफरेंडम कराकर कश्मीर का विलय पाकिस्तान में कराने की मांग करने लगा।हलाकि यह असम्बैधानिक था इसलिए इन मांगों को भारत की सभी सरकारों द्वारा ठुकरा दिया गया।भारत का सबिधान एक संघीय व्यवस्था को ही सपोर्ट करता है इसलिए चुनाव के आलावा ऐसा कोई अलग विधान नहीं है जो किसी भी राज्य सरकार को रेफरेंडम कराने का अधिकार देता हो।केजरी-यासीन की दोस्ती की प्रगाढ़ता उस समय देखने को मिली जब यासीन मालिक ने खुलेआम दिल्ली के 14 पर्सेंट मुसलमानो को आम आदमी पार्टी को वोट देने को कहा। इसका फायदा केजरीवाल को हुआ और बीजेपी पिछले चुनावों से ज्यादा वोट पाने के बावजूद एकजुट मुस्लिम वोटों की वज़ह से केजरीवाल ने बम्पर जीत दर्ज़ की।दिल्ली के साथ पाकिस्तान में भी आम आदमी पार्टी का जीत का जश्न मना जिसकी ख़बरें नेशनल मिडिया में भी आई।ये यासीन का ही प्रभाव था की आम आदमी पार्टी के जीत के जश्न में केवल हरे गुब्बारों और हरे गुलाल का ही प्रयोग किया गया।(सत्यापन के लिए गूगल पर जीत की जश्न की तस्वीरें सर्च करें)

रेफरेंडम के पीछे क्या है केजरी की मंसा?

1. केजरी दिल्ली में संबिधान के विरुद्ध दिल्ली में रेफरेंडम कराकर कश्मीर और पूर्वोत्तर के अलगाववादियों की उन मांगों को बल देना चाहते हैं जिसमे अलगाववादी रेफरेंडम के बेस पर अलग देश की मांग कर रहे हैं।अभी तक भारत सरकारें ऐसी मांगो को असम्बैधानिक बताकर ख़ारिज करती रही हैं लेकिन एक बार दिल्ली में ऐसा हो जाने पर सरकार के लिए मुश्किल हो जायेगा।इस तरह यासीन मालिक को दिये गए वादे को केजरी निभाने में केजरी सफल हो जायेंगे।
2. केजरीवाल ने दिल्ली से बहुत बड़े बड़े वादे किये जिनका पूरा होना नामुमकिन है।दिल्ली का टोटल बजट 41 हज़ार करोड़ रुपये का है और वादों को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष ढाई लाख करोड़ रुपये की जरुरत है।इस तरह संबिधान विरुद्ध कदम उठाकर जनता को  ये बताना चाहते हैं की मैं करना तो बहुत कुछ चाहता हूँ लेकिन मोदी ऐसा करने नहीं दे रहे हैं।चुकी दिल्ली की 70 पर्सेंट से अधिक जनता ऐसी है जो पढ़ी लिखी तो है लेकिन इतना गहराई में जाकर नहीं सोच सकती इस तरह खुद को केंद्र सरकार के साजिशों का शिकार बताकर काम न कर पाने का एक्सयूज मिल जायेगा।
3. केजरीवाल इस समय पार्टी के भीतर मचे हुए घमासान से त्रस्त हैं।जैसा की पार्टी के चार सांसदों में से तीन ने पार्टी हाईकमान पर हिटलरशाही का आरोप लगाकर मोर्चा खोला हुआ है,पंजाब चुनाव से पहले केजरीवाल की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।ऐसी स्थिति में केजरी कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे जनता का ध्यान पार्टी में मचे घमासान से हट जाए।


Sunday, April 12, 2015

काटजू !तू हिन्दू की संतान नहीं हो सकता है

भारत भू की पावनता है,ममता की परिभाषा है।
धर्म सनातन की सुचिता है,जन जन की अभिलाषा है।
है प्रभात का पूजन,जन जन के मन का आराधन है।
जिसका रूप स्वरुप स्वयं में गोकुल है वृन्दावन है।
परिवारों का पोषण है हर घर की भाग्य विधाता है।
पशु मत समझो इसे गाय तो हर हिन्दू की माता है।
लेकिन देखो काश्मीर का पंडित कैसे डोल गया।
बामन का वंशज होकर के बाबर की भाषा बोल गया।
अरे काटजू शर्म न आई तुझको ये बतलाने में।
बड़ा मजा आया था तुझको मांस गाय का खाने में।
फिर से तू खायेगा ये भी बड़ी शान से बोला है।
कुल के दुष्ट कलंकी तुझपे खून हमारा ख़ौला है।
जो हिन्दू गर गौ माता की चीर फाड़ कर सकता है।
वो अपनी निज माता का भी बलात्कार कर सकता है।
जिसे गाय के टुकड़ों में प्रोटीन नज़र आ सकती है।
उसको अपनी बहने भी रंगीन नज़र आ सकती हैं।
भूख लगे गर ज्यादा माँ की कमर काट कर खा ले तू।
फिर भी ना यों पेट भरे तो सूअर काट कर खा ले तू।
गौ माता को खाया तू इंसान नहीं हो सकता है।
कुछ भी हो तू हिन्दू की संतान नहीं हो सकता है।
एकदिन तू रौंदा जायेगा प्रतिशोधी उन्मादों में।
तेरा नाम लिखा जायेगा गज़नी की औलादों में।
न्यायधीश है लेकिन तुझमे न्यायाधीश सी बात नहीं।
गौ माता के मूत्र बराबर भी तेरी औकात नहीं।

Monday, November 3, 2014

कुत्तों की दावत में बब्बर शेर नही जाया करते


एक संपोला फिर से बोला बोल बगावत वाले जी,
जिसकी आँखों में कांटे हैं मंदिर और शिवाले जी,

मस्जिद की मीनारों से जो ज़हर उगलता रहता है,
जिसकी रग में सदा प्रदूषित रक्त विदेशी बहता है,

जिसकी टोपी के धागों में मंसूबे जेहादी हैं, 
जिसकी दाढ़ी में लटके कुछ मजहब के उन्मादी हैं,

जिसकी आँखों में सुरमा हैं नफरत के अंगारों का,
जिसके मूहँ में पान दबा है पाकिस्तानी नारों का,

है इमाम लेकिन हराम की रोटी का व्यापारी है,
भारत माँ पर बोझ बना है, उसका नाम बुखारी है,

अपनी गद्दी अपने बेटे को बैठाने निकला है,
और सुना है बहुत बड़ा जलसा करवाने निकला है,

जलसे में दुश्मन धरती के हाकिम को बुलवाया है,
और हमारे मोदी जी को सरे आम बिसराया है,

सोच रहा है उसने खुलकर मोदी का उपहास किया,
लेकिन मूरख भूल गया है किंचित ना आभास किया,

मोदी मोदी है,सूरज को आँख दिखाने वाला है,
सरे आम इस्लाम की टोपी को ठुकराने वाला है,

तेरी क्या औकात बुखारी,मोदी को ठुकराने की,
नहीं ज़रुरत उसको है गद्दारों के नजराने की,

संविधान की मजबूरी है,दोनों हाथ मुरब्बा है,
लेकिन इतना याद रहे कि मोदी सबका अब्बा है,

अरे बुखारी जा तेरे बेटे का घर आबाद रहे,
खूब उडाना बकरे मुर्गे,लेकिन इतना याद रहे,

गौ मांस जो खांए,उनके संग नही खाया करते,
कुत्तों की दावत में बब्बर शेर नही जाया करते,